
देश में सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खालिस्तानी आतंकी गतिविधियों को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। खुफिया विभाग द्वारा जारी ताजा अलर्ट में आशंका जताई गई है कि आने वाले दिनों में धार्मिक स्थलों, विशेषकर मंदिरों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी प्रतिष्ठानों और अन्य संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की कोशिश की जा सकती है। इस इनपुट के बाद कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह अलर्ट एक संदिग्ध ईमेल और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर जारी किया गया है, जिसकी गंभीरता से जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को प्राप्त जानकारी में कुछ प्रमुख मंदिरों, रेलवे परिसरों और सरकारी भवनों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें संभावित लक्ष्य के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके बाद पुलिस बलों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी निगरानी मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), स्थानीय पुलिस और खुफिया इकाइयों के बीच समन्वय भी बढ़ाया गया है ताकि किसी भी खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तराखंड के कई धार्मिक स्थलों की सुरक्षा समीक्षा की गई है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ प्रवेश बिंदुओं पर जांच व्यवस्था को भी सख्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमकी से जुड़े संदेश का स्रोत क्या है और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इसे एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है और आम लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बड़े धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अद्यतन बनाए रखना आवश्यक है। हाल के वर्षों में विभिन्न आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी समूहों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं लेना चाहतीं। इसी वजह से खुफिया इनपुट मिलने के तुरंत बाद अलर्ट जारी कर सुरक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस अथवा सुरक्षा एजेंसियों को दें। जांच एजेंसियां ईमेल की तकनीकी पड़ताल, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य माध्यमों से इसकी सत्यता की पुष्टि करने में जुटी हुई हैं। फिलहाल देशभर में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित साजिश को समय रहते विफल किया जा सके।


