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महुआ मोइत्रा को सर्किट हाउस का कमरा खाली करने का नोटिस

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पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ा एक नया विवाद सामने आया है। मामला सर्किट हाउस में उनके लिए लंबे समय से आरक्षित बताए जा रहे कमरे को खाली कराने के नोटिस से जुड़ा है। लिंक में दी गई खबर की विस्तृत जानकारी के आधार पर खबर:

महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह 14 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे कृष्णनगर सर्किट हाउस पहुंचीं और उन्हें वही कमरा दिया गया, जिसमें वह पहले भी ठहरती रही हैं। रात करीब 9:20 बजे उनके कमरे में खाना पहुंचा, लेकिन इसके कुछ देर बाद रात 9:47 बजे उन्हें फोन कर कमरा खाली करने के लिए कहा गया। महुआ ने दावा किया कि रात 10:52 बजे उन्हें इसी संबंध में लिखित संदेश भी मिला।

महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि उस समय सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा थे और नारेबाजी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से बार-बार फोन और संदेश भेजकर उनसे कमरा खाली करने के लिए कहा गया। महुआ ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी टैग करते हुए कहा कि वह 2029 तक निर्वाचित सांसद हैं और लोकसभा सत्र एक दिन पहले ही समाप्त हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और अन्य नेताओं को इलाके से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। महुआ ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस दबाव के आगे पीछे नहीं हटेंगी।

इस घटना पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित सांसद को इस तरह सर्किट हाउस का कमरा खाली करने के लिए कहना उसके विशेषाधिकारों से जुड़ा मामला हो सकता है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे एक महिला सांसद के साथ अनुचित व्यवहार बताया।

महुआ मोइत्रा और सर्किट हाउस प्रशासन के बीच यह विवाद अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ महुआ का आरोप है कि उन्हें देर रात अचानक कमरा खाली करने के लिए दबाव डाला गया, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए सरकारी सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल महुआ मोइत्रा ने साफ कर दिया है कि उन्होंने कमरा खाली करने से इनकार कर दिया था और वह अपने रुख पर कायम हैं।

कुल मिलाकर, कृष्णनगर सर्किट हाउस में देर रात महुआ मोइत्रा को कमरा खाली करने के कथित आदेश ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। महुआ मोइत्रा ने इसे दबाव की कार्रवाई बताया है, जबकि विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद मामला और राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।

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