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मिडिल ईस्ट में जंग का नया मोर्चा

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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है और अब इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास जोरदार धमाके और धुएँ के गुबार देखे गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने इंटरसेप्ट किया। इंटरसेप्शन के बाद मलबा गिरने से दुबई एयरपोर्ट के आसपास धुआँ उठता दिखाई दिया और कुछ समय के लिए उड़ानों पर भी असर पड़ा।

मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष तब और भड़क गया जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए न सिर्फ इज़राइल बल्कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। पिछले कुछ दिनों में ईरान ने यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी अरब की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिनमें से कई को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया।

दुबई और शारजाह जैसे शहर, जो आमतौर पर सुरक्षित और शांत माने जाते हैं, अब युद्ध के खतरे से जूझ रहे हैं। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार देश ने हाल के दिनों में बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों और सैकड़ों ड्रोन हमलों का सामना किया है, जिनमें से अधिकांश को रोक लिया गया, लेकिन कुछ हमलों से मामूली नुकसान और हताहतों की खबर भी सामने आई है।

उधर खाड़ी देशों में बढ़ते हमलों के कारण क्षेत्र में हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है। कई देशों ने अस्थायी रूप से एयरस्पेस बंद कर दिया था और हजारों यात्री अलग-अलग एयरपोर्ट पर फंस गए। हालांकि हालात को सामान्य करने के लिए कुछ जगहों पर सीमित उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू की जा रही हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो यह सिर्फ इज़राइल और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने और प्रभावित इलाकों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील और अनिश्चित बने हुए हैं।

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