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पूरे देश में पहुंचा मानसून, लेकिन IMD की चेतावनी

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देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार अपनी पहुंच बना ली है और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 9 जुलाई को मानसून ने पूरे भारत को कवर कर लिया। यह सामान्य तिथि से केवल एक दिन बाद हुआ है। हालांकि मानसून के पूरे देश में सक्रिय होने के बावजूद मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। मानसून की गतिविधियां कमजोर होने से कई इलाकों में तापमान बढ़ने, उमस में इजाफा होने और गर्मी दोबारा महसूस होने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरे देश में पहुंच जाने का मतलब यह नहीं है कि हर राज्य में लगातार बारिश होती रहेगी। मानसून के दौरान सक्रिय और कमजोर चरण सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। जब मानसून कमजोर पड़ता है तो कई क्षेत्रों में कुछ दिनों तक वर्षा लगभग रुक जाती है, जिससे दिन और रात दोनों समय तापमान बढ़ने लगता है। खासकर उत्तर-पश्चिम, मध्य और कुछ पूर्वी राज्यों में लोगों को तेज धूप, उमस और गर्म हवाओं जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में गर्मी का प्रभाव मानसून से पहले वाली हीटवेव जितना तीव्र नहीं होता, लेकिन अधिक नमी के कारण शरीर पर इसका असर अधिक महसूस हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश रुकने के बाद हवा में नमी बनी रहती है, जिससे पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में कठिनाई होती है। यही वजह है कि उमस भरी गर्मी के दौरान हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों का कहना है कि पर्याप्त पानी पीना, धूप में लंबे समय तक रहने से बचना और हल्के कपड़े पहनना इस मौसम में बेहद जरूरी है।

हालांकि कुछ इलाकों में बारिश कमजोर पड़ने की संभावना है, लेकिन देश के कई हिस्सों में भारी वर्षा का दौर जारी रहने का भी अनुमान है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत सहित कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और एल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी घटनाओं के कारण मानसून का स्वरूप अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। कभी बहुत कम समय में अत्यधिक वर्षा हो रही है तो कभी लंबे अंतराल तक बारिश नहीं हो रही। इसका सीधा असर खेती, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में मौसम विभाग की नियमित चेतावनियों पर ध्यान देना और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

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