
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना यानी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण कार्य ने महाराष्ट्र में तेजी पकड़ ली है। ठाणे और पालघर जिले के बीच 135.45 किलोमीटर लंबे हिस्से में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है। इस सेक्शन में 74 किलोमीटर तक पियर्स यानी पुल के खंभे तैयार हो चुके हैं, जिन पर आगे वायाडक्ट के गर्डर लगाए जाएंगे। इसके साथ ही 100 किलोमीटर से ज्यादा हिस्से में एलिवेटेड ढांचे का काम जारी है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 508 किलोमीटर है। यह महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इस पूरे कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेशनल स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि इसकी डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है। परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 1 घंटे 58 मिनट तक कम करने का लक्ष्य है।
महाराष्ट्र में जिस हिस्से पर फिलहाल तेजी से काम हो रहा है, वह ठाणे जिले के शिलफाटा से महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास पालघर के जरोली गांव तक जाता है। इस 135.45 किलोमीटर के सेक्शन में करीब 124.027 किलोमीटर हिस्सा वायाडक्ट और पुलों का होगा। यानी ट्रेन का अधिकांश मार्ग जमीन से ऊपर बने एलिवेटेड ट्रैक पर होगा। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार ट्रेन के लिए अलग और सुरक्षित कॉरिडोर तैयार करना है।
इस सेक्शन की एक खास बात यह है कि ठाणे, विरार और बोइसर में 3 एलिवेटेड हाई स्पीड रेल स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इन स्टेशनों को सामान्य रेलवे स्टेशनों से अलग आधुनिक हाई स्पीड रेल नेटवर्क के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। ठाणे स्टेशन का कॉनकोर्स जमीन से लगभग 12 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इसकी एक वजह ठाणे के संवेदनशील मैंग्रोव क्षेत्र को संरक्षित करना भी है।
परियोजना में सिर्फ पुल और स्टेशन ही नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में सुरंगों का निर्माण भी तेजी से हो रहा है। पालघर जिले में कई माउंटेन टनल पर काम चल रहा है और इनमें से 3 सुरंगों में ब्रेकथ्रू हासिल किया जा चुका है। फरवरी 2026 में पालघर में 454 मीटर लंबी MT-6 सुरंग का ब्रेकथ्रू हुआ था। इससे पहले जनवरी में सफाले के पास MT-5 सुरंग में भी सफलता हासिल हुई थी।
सुरंग निर्माण में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड यानी NATM जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक में खुदाई के दौरान आसपास की चट्टानों और जमीन को प्राकृतिक सपोर्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तथा सुरंग की दीवारों को मजबूत करने के लिए कंक्रीट की परत चढ़ाई जाती है। कठिन पहाड़ी इलाकों में इस तकनीक का इस्तेमाल परियोजना के निर्माण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में बड़े नदी पुल भी बनाए जा रहे हैं। ठाणे और पालघर के बीच का इलाका समुद्र, पहाड़ियों, नदियों और मैंग्रोव जैसे अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से गुजरता है। इसलिए इस कॉरिडोर के निर्माण में इंजीनियरों के सामने कई तरह की तकनीकी चुनौतियां हैं। एलिवेटेड वायाडक्ट, सुरंग और नदी पुलों का एक साथ निर्माण परियोजना को देश की सबसे बड़ी और जटिल रेल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल करता है।
परियोजना की प्रगति को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी हाल में ठाणे और पालघर के निर्माण कार्य की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। मौजूदा प्रगति यह संकेत देती है कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अब केवल कागज पर बनी योजना नहीं, बल्कि जमीन पर तेजी से आकार ले रहा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बन चुका है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश का पहला समर्पित हाई स्पीड रेल कॉरिडोर होगा। इसके जरिए भारत को हाई स्पीड ट्रेन संचालन के साथ-साथ आधुनिक ट्रैक, सिग्नलिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, स्टेशन और सुरंग निर्माण जैसी तकनीकों में नया अनुभव मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से देश में हाई स्पीड रेल के लिए घरेलू तकनीकी और औद्योगिक क्षमता भी विकसित होगी।
इस पूरे कॉरिडोर में मुंबई का बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन भूमिगत होगा, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात के अधिकांश अन्य स्टेशन एलिवेटेड बनाए जा रहे हैं। ठाणे, विरार और बोइसर जैसे स्टेशन महाराष्ट्र के इस हिस्से में हाई स्पीड रेल नेटवर्क के महत्वपूर्ण पड़ाव होंगे।
कुल मिलाकर, ठाणे और पालघर में 74 किलोमीटर पियर्स का तैयार होना और 100 किलोमीटर से ज्यादा एलिवेटेड संरचना पर काम आगे बढ़ना बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में इन खंभों पर गर्डर लॉन्च करने, ट्रैक बिछाने, स्टेशनों को आकार देने और सुरंगों के बाकी काम को पूरा करने पर जोर रहेगा। जैसे-जैसे ये काम आगे बढ़ेंगे, देश की पहली बुलेट ट्रेन का सपना जमीन पर और स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेगा।



