
सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘370 रुपये की बिरयानी’ विवाद ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर बड़ा रूप ले लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कॉमेडियन प्रणीत मोरे और गुरुग्राम निवासी हिमांशु जांगड़ा को 22 जून को पेश होने के लिए तलब किया है। साथ ही हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को मामले में उचित कार्रवाई करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पूरा विवाद एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान शुरू हुआ था, जब दर्शकों के बीच मौजूद हिमांशु जांगड़ा ने अपनी डेटिंग से जुड़ा एक अनुभव साझा किया। वायरल वीडियो में उन्होंने दावा किया कि डेट पर उन्होंने लगभग 370 रुपये की चिकन बिरयानी खिलाई थी और इसके बदले में उन्हें कुछ “वापसी” की उम्मीद थी। वीडियो में उनके कुछ बयान ऐसे थे जिन्हें सोशल मीडिया पर महिलाओं की सहमति (Consent) का मजाक उड़ाने और जबरदस्ती को सामान्य बनाने वाला बताया गया। यही वीडियो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया और लोगों के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपने बयान में कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई बातें महिलाओं की गरिमा, स्वायत्तता और सहमति की अवधारणा को कमजोर करती हैं। आयोग का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियों को मनोरंजन के नाम पर सार्वजनिक मंचों पर पेश करना समाज में गलत संदेश देता है और महिलाओं के प्रति हिंसा तथा उत्पीड़न को सामान्य बनाने का खतरा पैदा करता है। इसी कारण आयोग ने न केवल दोनों संबंधित व्यक्तियों को नोटिस भेजा है, बल्कि पुलिस से यह भी पूछा है कि क्या इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं।
विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र साइबर सेल ने भी मामले में FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंच पर साझा की गई सामग्री आपत्तिजनक थी और इससे महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता को बढ़ावा मिला। इस कार्रवाई के बाद मामला केवल सोशल मीडिया बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच एजेंसियों और कानूनी संस्थाओं के दायरे में भी पहुंच गया है।
इस पूरे विवाद में कॉमेडियन प्रणीत मोरे की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। आलोचकों का कहना है कि जब हिमांशु जांगड़ा मंच पर विवादित बातें कर रहे थे, तब प्रणीत मोरे ने उन्हें रोकने या उनकी बात का विरोध करने के बजाय हंसकर प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया। बढ़ते दबाव के बाद प्रणीत मोरे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उन्हें उस समय टिप्पणी का विरोध करना चाहिए था और ऐसा न करना उनकी गलती थी। बाद में उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी निष्क्रिय कर दिया।
विवाद का असर हिमांशु जांगड़ा के पेशेवर जीवन पर भी पड़ा। गुरुग्राम स्थित उनकी कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी प्रबंधन का कहना था कि वायरल वीडियो में दिखाई गई टिप्पणियां संगठन के मूल्यों और कार्य संस्कृति के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर उनके खिलाफ पहले कभी कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन विवाद के कारण कंपनी की छवि प्रभावित हो रही थी।
इस मामले ने पूरे देश में ‘कंसेंट’ यानी सहमति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर #BiryaniIsNotConsent ट्रेंड करने लगा और कई लोगों ने यह संदेश दिया कि किसी महिला पर पैसा खर्च करने या उसे भोजन कराने का मतलब यह नहीं है कि बदले में किसी प्रकार की शारीरिक निकटता की अपेक्षा की जाए। यहां तक कि मुंबई पुलिस ने भी इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया, जिसे लाखों लोगों ने देखा और सराहा।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक वायरल वीडियो का नहीं है, बल्कि समाज में मौजूद उन सोचों को उजागर करता है जो महिलाओं की सहमति को गंभीरता से नहीं लेतीं। उनका मानना है कि राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संदेश है कि सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर किसी भी तरह की गैर-जिम्मेदार टिप्पणी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अब सभी की नजरें 22 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां प्रणीत मोरे और हिमांशु जांगड़ा को महिला आयोग के सामने अपना पक्ष रखना होगा। इस सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता तय हो सकता है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया, कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।



