
नई दिल्ली। भारत विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर बड़ा अभियान चलाया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश के विभिन्न हिस्सों में एक साथ छापेमारी कर उन नेटवर्कों की जांच तेज कर दी है, जिनके तार पाकिस्तान में बैठे आतंकियों और अपराध सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं। ताजा कार्रवाई विशेष रूप से पाकिस्तान स्थित आतंकी शाहजाद और उसके सहयोगियों से जुड़े मामलों पर केंद्रित रही।
सूत्रों के अनुसार यह छापेमारी तीन अलग-अलग आतंकी-गैंगस्टर मामलों की जांच के तहत की गई। जांच एजेंसियों को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी और संगठित अपराधी भारत में अपने सहयोगियों के जरिए हथियारों की तस्करी, फंडिंग, रंगदारी और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में कई संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि हाल के वर्षों में आतंकी संगठनों और गैंगस्टर नेटवर्क के बीच गठजोड़ मजबूत हुआ है। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर भारत के भीतर सक्रिय अपराधियों का इस्तेमाल कर आतंकवादी गतिविधियों के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट, धन और स्थानीय नेटवर्क उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसी नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।
NIA की टीमों ने छापेमारी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से नेटवर्क की संरचना, विदेशी संपर्कों और फंडिंग के स्रोतों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। फिलहाल जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान से संचालित कई मॉड्यूल आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए संपर्क बनाए रखने तथा नेटवर्क संचालित करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे डिजिटल नेटवर्क की भी गहन जांच कर रही हैं ताकि किसी बड़े षड्यंत्र को समय रहते विफल किया जा सके।
हाल के महीनों में NIA ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी साजिशों के खिलाफ कई बड़े अभियान चलाए हैं। पिछले सप्ताह भी एजेंसी ने कई राज्यों में छापेमारी कर ऐसे मॉड्यूल का पर्दाफाश करने की कोशिश की थी, जिन पर ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक सामग्री भारत में पहुंचाने का आरोप था। जांच में सामने आया था कि सीमा पार से हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति कर देश के विभिन्न शहरों में आतंकी गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के खिलाफ काम करने वाले आतंकी संगठन अब पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ संगठित अपराध का भी सहारा ले रहे हैं। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने में मदद मिलती है। यही कारण है कि एजेंसियां आतंकवाद और गैंगस्टर नेटवर्क को एक साथ जोड़कर जांच कर रही हैं।
NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या इन नेटवर्कों का संबंध देश में हुई किसी हालिया आपराधिक या आतंकी घटना से भी रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में कुछ और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत आतंकवाद और सीमा पार से प्रायोजित हिंसा के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत आतंकी संगठनों, उनके फंडिंग नेटवर्क और सहयोगी अपराध सिंडिकेट के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे नेटवर्कों को समय रहते ध्वस्त करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
फिलहाल NIA की यह कार्रवाई पाकिस्तान से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर गठजोड़ पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखी जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क की पहुंच कितनी व्यापक थी और इसके जरिए देश के भीतर किस प्रकार की गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी की जा रही थी।



