
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में करीब ₹3,350 करोड़ की पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क और हवाई संपर्क मजबूत करना, बिजली की उपलब्धता बेहतर बनाना, प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और पानी की समस्या से निपटना है। कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया गया। इन योजनाओं को लद्दाख के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की सुविधाओं और रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन परियोजनाओं में सबसे प्रमुख 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क है, जिसे सीमा सड़क संगठन यानी BRO ने तैयार किया है। यह सड़क लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ती है और रास्ते में दुर्गम जांस्कर घाटी से गुजरती है। इसके शुरू होने से लद्दाख तक पहुंचने के लिए श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह मार्गों के अलावा एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होगा। इससे स्थानीय लोगों को आवाजाही में सुविधा मिलने के साथ-साथ सेना के जवानों और जरूरी सामान की आवाजाही को भी मदद मिलने की उम्मीद है।
इस सड़क का सामरिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह ऊंचे हिमालयी क्षेत्र और शिंकुन ला दर्रे के चुनौतीपूर्ण इलाके से होकर गुजरती है। वैकल्पिक संपर्क मार्ग होने से मौजूदा रास्तों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कठिन मौसम और ऊंचाई से जुड़ी परिस्थितियां इस मार्ग के नियमित इस्तेमाल को प्रभावित कर सकती हैं। शिंकुन ला के नीचे लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी दोहरी सुरंग बनाने की योजना भी है, जिसका उद्देश्य भविष्य में आवागमन को और अधिक भरोसेमंद बनाना है।
प्रधानमंत्री ने लेह स्थित कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट के नए यात्री टर्मिनल का भी उद्घाटन किया। लगभग ₹640 करोड़ की लागत से बने इस टर्मिनल का क्षेत्रफल करीब 23,800 वर्ग मीटर है और इसे सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ लद्दाख की पारंपरिक वास्तुकला के तत्व शामिल किए गए हैं। टर्मिनल में भू-तापीय ऊर्जा के इस्तेमाल की व्यवस्था भी की गई है, जिससे ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी ट्रांसमिशन लाइन भी शुरू की गई। इन परियोजनाओं का लक्ष्य बिजली उत्पादन और उसके वितरण नेटवर्क को बेहतर बनाना है। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति स्थानीय परिवारों, कारोबार, सार्वजनिक सेवाओं और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है। नई सुविधाओं से क्षेत्र के बिजली ढांचे की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लेह के सिंधु घाट पर भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क भी शुरू किया गया। पेट्रोग्लिफ प्राचीन चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियां और चित्र होते हैं, जिनमें मनुष्यों, जानवरों और प्रतीकों के चित्र मिलते हैं। ये निशान हजारों वर्षों के इतिहास और उस समय के जीवन को समझने में मदद करते हैं। संरक्षण पार्क का उद्देश्य इन पुरातात्विक धरोहरों को सुरक्षित रखना, लोगों में जागरूकता बढ़ाना और जिम्मेदार विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करना है।
पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में विकसित किए गए 40 जल निकायों का भी उद्घाटन किया गया। लद्दाख में बर्फ पिघलने और पानी उपलब्ध होने का समय खेती की जरूरतों से हमेशा मेल नहीं खाता। कई बार बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में पानी को उपलब्धता के समय संचित करके जरूरत के वक्त इस्तेमाल करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे सिंचाई और ग्रामीण आजीविका को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
इन सभी परियोजनाओं को मिलाकर देखें तो लद्दाख में परिवहन, ऊर्जा, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़ी जरूरतों पर एक साथ काम किया गया है। नई सड़क से क्षेत्रीय और सामरिक संपर्क बेहतर हो सकता है, जबकि एयरपोर्ट टर्मिनल यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने में मदद करेगा। वहीं, जल निकाय और बिजली परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभा सकती हैं। इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके नियमित संचालन, रखरखाव और स्थानीय लोगों तक सुविधाओं की प्रभावी पहुंच पर निर्भर करेगा।



