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RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI में नहीं मिलेगी राहत

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी जून 2026 की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने शुक्रवार को नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए बताया कि सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ नीति रुख (Neutral Stance) भी बरकरार रखा है।

RBI के इस फैसले का सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग ब्याज दर वाले कर्जों पर पड़ेगा। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने के कारण फिलहाल कर्जदारों की EMI में कमी की उम्मीद नहीं है। वहीं, बैंकों की जमा योजनाओं और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी तत्काल बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।

मौद्रिक नीति समिति ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। RBI ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाया है, जबकि आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) के अनुमान में कुछ कटौती की गई है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत स्थिति में है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्कता बरतना जरूरी है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि महंगाई अभी RBI की निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत की सीमा के भीतर है, इसलिए फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश है। हालांकि भविष्य में महंगाई, मानसून की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों के आधार पर ब्याज दरों को लेकर नया फैसला लिया जा सकता है।

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