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भोपाल से कोटा सिर्फ 5 घंटे में! बुंदेलखंड को मिलेगी हाईस्पीड कनेक्टिविटी

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मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली एक बड़ी परियोजना जल्द ही तस्वीर बदल सकती है। सागर से कोटा के बीच प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के जरिए भोपाल, सागर, विदिशा और बुंदेलखंड के इलाकों को राजस्थान के कोटा समेत जयपुर और उदयपुर जैसे प्रमुख शहरों से तेज कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट का नाम कोटा-विदिशा-सागर एक्सप्रेसवे बताया गया है और यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 16 हजार करोड़ रुपये है। नया कॉरिडोर बनने के बाद भोपाल से कोटा की मौजूदा करीब 8 से 9 घंटे की यात्रा घटकर लगभग 4 से 5 घंटे रह सकती है। प्रस्तावित नए अलाइनमेंट से भोपाल और कोटा के बीच की दूरी भी करीब 75 किलोमीटर तक कम होने का अनुमान है, जिससे यात्रियों को समय के साथ-साथ पुराने व्यस्त मार्गों के ट्रैफिक से भी राहत मिल सकती है।

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-कॉरिडोर कनेक्टिविटी होगी। प्रस्तावित सागर-कोटा मार्ग कोटा के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा यह भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर और चंबल एक्सप्रेसवे से भी इंटरकनेक्ट होगा। इस कनेक्टिविटी के आगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान होने की संभावना है, जिससे मध्य प्रदेश के कई हिस्सों को उत्तर भारत और पश्चिम भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर का रूट कोटा से शुरू होकर झालावाड़ और अकलेरा की ओर जाएगा और मध्य प्रदेश में प्रवेश करने के बाद गुना जिले के चाचौड़ा और मकसूदनगढ़, फिर बैरसिया और विदिशा होते हुए सागर तक पहुंचेगा। भोपाल को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के लिए राजस्थान की ओर तेज और सीधी आवाजाही का रास्ता तैयार हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरा कोटा-विदिशा-सागर प्रोजेक्ट करीब 300 किलोमीटर लंबा होगा, जबकि विदिशा से कोटा वाला हिस्सा लगभग 275 किलोमीटर का बताया गया है। यह मौजूदा घुमावदार और भीड़भाड़ वाले मार्गों से अलग नए अलाइनमेंट पर विकसित किया जाएगा, जिससे हाईस्पीड यात्रा को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे के दायरे में रहने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

इस परियोजना का असर सिर्फ यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहने वाला है। बेहतर सड़क संपर्क से सागर, विदिशा और आसपास के बुंदेलखंड क्षेत्र को बड़े बाजारों, औद्योगिक केंद्रों और पर्यटन स्थलों से जोड़ने में मदद मिल सकती है। कोटा के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंच बनने से जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों की कनेक्टिविटी भी आसान होगी, जिससे व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की ओर से अलाइनमेंट का फाइनल सर्वे किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से चाचौड़ा-मकसूदनगढ़ और भोपाल-बैरसिया रोड से जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। अब फाइनल DPR आने के बाद परियोजना पर आगे की प्रक्रिया और निर्माण कार्य की दिशा स्पष्ट होगी

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