
बिहार की राजनीति फिर से एक विवादित मोड़ पर आ गई है, जब राज्य के सम्राट चौधरी, जो वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री हैं, ने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को निशाना बनाते हुए एक तेज़ बयान दिया, और इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। चौधरी ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कहा कि वह व्यक्ति, जिसने पहले यह दावा किया कि बिहार पुलिस “एक चींटी भी नहीं मार सकती”, अब पुलिस की कार्रवाई से डर रहा है और अस्पताल जाकर बीमार होने की बात कह रहा है। यह बयान स्पष्ट रूप से पप्पू यादव की ओर इशारा है, जिन पर हाल ही में पटना पुलिस ने एक पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट के आधार पर कार्रवाई की थी, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई थी।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी, जो पटना में देर रात उनके आवास से की गई थी, ने राजनैतिक माहौल को और उग्र कर दिया। उनके समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और हंगामा किया, जबकि यादव ने यह आरोप लगाया कि उनके साथ बिना उचित वारंट और सूचना के “अनुचित तरीके” से व्यवहार किया गया। बाद में उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनके समर्थक भारी संख्या में जुटे रहे और पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई।
इसके जवाब में सम्राट चौधरी ने राजनीतिक संदर्भ में पप्पू यादव पर हमला बोला और यह संकेत दिया कि जो लोग पहले पुलिस की क्षमता पर सवाल उठाते थे, वही अब पुलिसिया कार्रवाई से डर का दिखावा कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच यह घमासान राज्य की राजनीति में नए सियासी विवाद और बयानबाज़ी का बहाना बन गया है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पप्पू यादव की गिरफ्तारी और उसके बाद उनकी प्रतिक्रिया ने विपक्षी दलों की राजनीति को एक नया मोड़ दिया है और समर्थन-आलोचना की झंझावात तेज़ कर दी है। इसी दौरान यादव ने भी विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर सरकार पर आरोप लगाए हैं कि उन्हें अन्यायपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, और उन्होंने कहा है कि वह अपनी लड़ाई न्यायालय और जनता के साथ आगे जारी रखेंगे।
यह विवाद बिहार में कानून-व्यवस्था, सियासी बयानबाज़ी, और सत्ता के पारस्परिक दबावों के बीच लगातार बदलते राजनीतिक समीकरण को दर्शाता है, और आगामी दिनों में इस पर और भी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।



