
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन-1, 2’ का उद्घाटन किया
आज देश के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी में नए ‘सेवा तीर्थ’ परिसर के साथ-साथ कर्तव्य भवन-1 और 2 का औपचारिक उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी के केतरी मार्ग (Kartavya Path) स्थित आधुनिक शासन केंद्र में आयोजित हुआ और इसमें केंद्रीय नेतृत्व के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया। उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) एवं संबंधित सचिवालयों का संचालन अब नया कार्यालय परिसर “सेवा तीर्थ” से होगा, जो प्रशासनिक कार्यों के आधुनिक, सुगम और नागरिक-केन्द्रित ढांचे का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने दोपहर लगभग 1:30 बजे नए भवन परिसर का नाम “सेवा तीर्थ” के रूप में अनावरण किया और इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि “सेवा के प्रति समर्पण” की भावना का प्रतीक है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा कैबिनेट सचिवालय को एकीकृत रूप से रखा गया है। इससे पहले ये संस्थाएँ अलग-अलग पुरानी इमारतों में कार्यरत थीं, जो आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थीं।
कर्तव्य भवन-1 और 2 में केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालयों का संचालन होगा, जिनमें वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शिक्षा सहित अन्य केंद्रीय विभाग शामिल हैं। इन बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स को डिजिटल-इंटीग्रेटेड ऑफिस सुविधाओं, पर्यावरण-संग्रहित डिज़ाइन और स्मार्ट सुरक्षा प्रबंधन के साथ तैयार किया गया है ताकि शासन-कार्य अधिक कुशल, पारदर्शी और सुसंगठित ढंग से चल सके।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की कि पुराने “उद्योग भवन मेट्रो स्टेशन” का नाम भी अब बदलकर सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन कर दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र के साथ-साथ इस नए प्रशासनिक परिसर का नाम और पहचान और स्पष्ट रूप से जुड़ जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण में बताया कि यह बदलाव केवल स्थानान्तरण नहीं बल्कि शासन के ढांचे में नए भारत के विकास एवं सेवा-केन्द्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ से कामकाज शुरू करने का यह दिन “विकसित भारत” की दिशा में एक नया अध्याय लिखता है और अब शासन के केंद्र में रहने वाले अधिकारियों एवं नागरिकों के बीच बेहतर संपर्क और सहयोग का मार्ग सुदृढ़ होगा।
कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि इस अवसर को चिह्नित करने के लिए ₹100 का स्मारक सिक्का भी जारी किया जाएगा, जो भारतीय प्रशासन के इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाएगा।
विश्लेषकों का मानना है कि ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवनालयों का उद्घाटन सिर्फ इमारती बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत में शासन-कार्य में आधुनिकता, दक्षता और नागरिक-उन्मुख सेवाओं को प्राथमिकता देने का संकेत है। इसके अलावा यह कदम ब्रिटिश-कालीन सेंट्रल विस्टा संरचना से हटकर एक नए भारत के सृजन की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रतीत होता है।



