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संसद भवन एनेक्सी में हुई अहम बैठक, शशि थरूर की अध्यक्षता में विदेश मामलों पर गहन मंथन

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संसद भवन एनेक्सी में आयोजित विदेश मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति की बैठक ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति और वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अगुवाई में हुई इस बैठक में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सांसदों को कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जानकारी दी। बैठक का मुख्य फोकस पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की कूटनीतिक रणनीति पर रहा।

बैठक के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके भारत पर संभावित प्रभावों को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। सांसदों को बताया गया कि सरकार क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, संभावित निकासी योजनाओं और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।

शशि थरूर ने बैठक के बाद संकेत दिया कि समिति के सदस्यों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। विभिन्न दलों के सांसदों ने क्षेत्रीय संघर्षों, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और भारतीय हितों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अपने विचार रखे। बताया गया कि बैठक में बड़ी संख्या में सदस्यों ने हिस्सा लिया और विदेश नीति से जुड़े अनेक पहलुओं पर सवाल पूछे।

बैठक में केवल सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि भारत की उभरती वैश्विक भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया। बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों, वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग और नई तकनीकों के कूटनीतिक उपयोग जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा बने। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति संसद की उन महत्वपूर्ण समितियों में शामिल है जो विदेश मंत्रालय के कामकाज, नीतियों और अंतरराष्ट्रीय मामलों की समीक्षा करती हैं। समिति का नेतृत्व वर्तमान में शशि थरूर कर रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मामलों और कूटनीति का गहरा अनुभव रखने वाले नेताओं में गिना जाता है। संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय तक काम करने और विदेश राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने का उनका अनुभव समिति की चर्चाओं को विशेष महत्व प्रदान करता है।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है, संसद की समितियों में होने वाली इस तरह की चर्चाएं बेहद महत्वपूर्ण हो जाती हैं। इन बैठकों के जरिए सांसदों को जमीनी स्थिति की जानकारी मिलती है और सरकार को भी विभिन्न राजनीतिक दलों के सुझाव प्राप्त होते हैं। संसद भवन एनेक्सी में हुई यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जहां राष्ट्रीय हितों और विदेश नीति से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया गया।

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