
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में दुर्गा पूजा से पहले लगाए गए पोस्टरों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद शुरू हो गया है। इन पोस्टरों में लोगों से बिरयानी, मांस और पूजा से जुड़ी सामग्री हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील की गई है। शहर के कई इलाकों में ऐसे पोस्टर नजर आने के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों और स्थानीय लोगों ने इस अभियान पर सवाल उठाए हैं।
इस पोस्टर अभियान की जिम्मेदारी हिंदू जागरण मंच ने ली है। संगठन की ओर से लगाए गए संदेशों में कहा गया है कि लोग बिरयानी और पूजा सामग्री खरीदते समय हिंदू दुकानदारों को प्राथमिकता दें। कुछ पोस्टरों में मांस खरीदने के लिए भी हिंदू दुकानों का रुख करने की अपील की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, शहर में 100 से अधिक पोस्टर लगाए गए हैं।
संगठन के नेताओं का कहना है कि इस पहल का मकसद त्योहार के दौरान हिंदू कारोबारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। उनका दावा है कि यह किसी समुदाय के खिलाफ निर्देश या बहिष्कार का आह्वान नहीं, बल्कि अपने समुदाय के व्यापारियों का समर्थन करने की अपील है। संगठन से जुड़े लोगों ने यह भी कहा कि स्थानीय कारोबारियों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखकर यह अभियान चलाया गया है।
हालांकि, इस अभियान की आलोचना भी हो रही है। विपक्षी नेताओं ने पोस्टरों को सामाजिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिहाज से चिंताजनक बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। वामपंथी नेताओं का कहना है कि खरीदारी और खानपान को दुकानदार की धार्मिक पहचान से जोड़ना समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकता है।
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि रोजमर्रा की खरीदारी और खाने-पीने के विकल्पों को धर्म के आधार पर बांटना उचित है या नहीं। वहीं, संगठन के समर्थकों का तर्क है कि किसी खास समुदाय के कारोबारियों को प्राथमिकता देना उनकी अपील है और ग्राहक अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल में बाजारों, खानपान और छोटे कारोबार से जुड़ी गतिविधियां तेज हो जाती हैं। त्योहार के दौरान मिठाई, मांस, बिरयानी, फूल और पूजा सामग्री की मांग बढ़ती है। ऐसे में दुकानदारों को धार्मिक पहचान के आधार पर प्राथमिकता देने की अपील ने व्यापार, संस्कृति और सामाजिक मेलजोल को लेकर बहस छेड़ दी है।
पोस्टर विवाद के बीच राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। आलोचकों ने इस अभियान को विभाजनकारी बताते हुए सत्तारूढ़ भाजपा पर भी सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा की ओर से कहा गया है कि हिंदू जागरण मंच एक स्वतंत्र संगठन है और इस अभियान में पार्टी की भूमिका नहीं है। इस तरह यह मुद्दा स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर राज्य की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
फिलहाल, सिलीगुड़ी में पोस्टरों को लेकर बहस जारी है। एक तरफ संगठन इसे हिंदू कारोबारियों के समर्थन की पहल बता रहा है, तो दूसरी तरफ आलोचक इसे धार्मिक पहचान के आधार पर खरीदारी को प्रोत्साहित करने वाला अभियान मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और दुर्गा पूजा से पहले उठे इस विवाद का स्थानीय माहौल पर क्या असर पड़ता है।



