Advertisement
दिल्ली (यूटी)लाइव अपडेट
Trending

अस्पताल से सोनम वांगचुक की सरकार को चिट्ठी

Advertisement
Advertisement

दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर अपने अनिश्चितकालीन अनशन को समाप्त करने की शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। वांगचुक ने पत्र में दोनों मंत्रियों के अस्पताल आकर उनसे मुलाकात करने और स्वास्थ्य की चिंता जताने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही कहा कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार छात्रों और आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित भरोसा देती है, तभी वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए है। उन्होंने लिखा कि परीक्षा संबंधी विवादों के बाद जिन छात्रों ने मानसिक तनाव में अपनी जान गंवाई, उनके परिवारों को उचित आर्थिक सहायता और न्याय मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में सामने आई खामियों और परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर संसद में गंभीर और विस्तृत चर्चा कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।

वांगचुक ने अपने पत्र में यह भी कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से स्पष्ट आश्वासन मांगा कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा को प्रताड़ित नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ऐसा भरोसा दिया जाता है तो वह अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही से भी जुड़ी रही। वांगचुक का कहना है कि परीक्षा विवाद और उससे जुड़े घटनाक्रम के बाद नैतिक जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार से प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया। उनके अनुसार, केवल प्रशासनिक सुधारों की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए।

इस बीच जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे CJP और अन्य छात्र संगठनों ने भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए चिंता व्यक्त की है। आंदोलन के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन आंदोलन का उद्देश्य केवल अनशन समाप्त कराना नहीं बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वांगचुक स्वास्थ्य कारणों से अनशन समाप्त करते हैं, तब भी आंदोलन विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से जारी रहेगा।

उधर, विपक्षी दलों ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। कई विपक्षी सांसदों ने अस्पताल जाकर सोनम वांगचुक से मिलने का प्रयास किया और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई। हालांकि सुरक्षा कारणों से उन्हें अस्पताल के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने सरकार से वार्ता का रास्ता अपनाने की मांग दोहराई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक का यह पत्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है। यदि सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल करती है तो लंबे समय से जारी गतिरोध समाप्त होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो शिक्षा सुधार और छात्रों के अधिकारों को लेकर चल रहा यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share