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ईरान की नाकेबंदी के बीच रात के अंधेरे में अमेरिकी सेना का सीक्रेट ऑपरेशन

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अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के तहत हर रात करीब 15 से 20 तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी मार्ग से सुरक्षित तरीके से गुजरने में मदद दी जा रही है। खाली टैंकर अरब सागर से खाड़ी में पहुंचते हैं, वहां तेल भरते हैं और फिर इसी मार्ग से बाहर निकलते हैं। दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए प्रतिदिन करीब 1 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही संभव हो रही है, हालांकि यह युद्ध से पहले इस मार्ग से गुजरने वाली मात्रा से काफी कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे अभियान की निगरानी अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग से की जा रही है और इसमें खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ समन्वय भी शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि हाल के अभियानों में ईरान की समुद्री निगरानी और रडार क्षमताओं को नुकसान पहुंचने के बाद इस मार्ग से टैंकरों की आवाजाही आसान हुई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है और क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा है। ईरान ने हाल ही में कहा है कि उसकी शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा, जबकि अमेरिका की ओर से इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बनाए रखने की कोशिश जारी है। इसी टकराव के बीच तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुप्त अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति में आई कमी को कुछ हद तक दूर करना और कच्चे तेल की कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 3 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसलिए होर्मुज से तेल टैंकरों को निकालने की यह व्यवस्था केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं। दोनों पक्ष होर्मुज पर अपनी-अपनी स्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। ऐसे में रात के अंधेरे में टैंकरों की यह आवाजाही आने वाले दिनों में भी जारी रहती है या नहीं, यह क्षेत्र में सैन्य और कूटनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

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