
यह विवाद घरेलू और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाने वाली कंपनी Beco के एक विज्ञापन अभियान से शुरू हुआ। Beco ने अपने ‘WarOnWhatsHidden’ अभियान में Surf Excel Matic Liquid और Vim Dishwash Gel में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि इनसे त्वचा में जलन या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने Beco की मूल कंपनी Kwick Living (I) Private Limited के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया।
HUL ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि Beco का विज्ञापन अभियान उसके उत्पादों को गलत तरीके से बदनाम करता है। कंपनी ने इसे व्यावसायिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला विज्ञापन, ट्रेडमार्क उल्लंघन और ‘passing off’ का मामला बताया है। HUL का तर्क है कि Beco ने कुछ रसायनों या अवयवों को लेकर दावे किए, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि तैयार उत्पाद का सामान्य इस्तेमाल वास्तव में त्वचा में जलन या एलर्जी का कारण बनता है।
मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने Beco को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। HUL ने अदालत से विज्ञापन अभियान के खिलाफ अंतरिम राहत की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगी कि अभियान पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं। अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की गई है।
यह मामला केवल दो कंपनियों के बीच कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धी विज्ञापन की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार में कंपनियां अपने उत्पादों की खूबियां बताने के लिए प्रतिस्पर्धी ब्रांडों से तुलना करती हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसी तुलना किस हद तक की जा सकती है। कानून के तहत किसी उत्पाद की तुलना करते हुए अपने ब्रांड को बेहतर बताना अलग बात है, लेकिन किसी प्रतिस्पर्धी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे करना, जिन्हें भ्रामक या अपमानजनक माना जाए, कानूनी विवाद का कारण बन सकता है।
इस मामले में Beco के अभियान ने सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के बीच इस्तेमाल होने वाले Surf Excel और Vim जैसे बड़े ब्रांडों के कुछ अवयवों पर सवाल उठाए। ऐसे दावों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी की सोच और उत्पादों की सुरक्षा को लेकर उनकी धारणा पर पड़ सकता है। यही वजह है कि HUL ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। दूसरी तरफ, Beco का अभियान उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और उपभोक्ताओं को उनके बारे में जानकारी दिए जाने के मुद्दे को सामने लाता है।
फिलहाल, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Surf Excel और Vim को लेकर Beco के विज्ञापन अभियान में किए गए दावे अदालत में विवाद का विषय हैं और इस मामले में अभी अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है। इसलिए केवल विज्ञापन में किए गए दावों के आधार पर उत्पादों को असुरक्षित या हानिकारक घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य पेश करेंगे, जिसके बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।
अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। अदालत का फैसला इस बात के लिए भी अहम हो सकता है कि कंपनियां अपने विज्ञापनों में प्रतिस्पर्धी ब्रांडों के उत्पादों और उनमें इस्तेमाल होने वाले अवयवों के बारे में किस तरह के दावे कर सकती हैं। यह मामला आगे चलकर भारत में comparative advertising और product disparagement से जुड़े नियमों पर भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।



