
95.7% नंबर के बाद भी नहीं मिला मनचाहा कॉलेज, 17 साल के छात्र ने दी जान
महाराष्ट्र के ठाणे से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा में 95.7% अंक हासिल करने वाले 17 वर्षीय छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इतनी अच्छी सफलता के बावजूद छात्र अपने पसंदीदा संस्थान में दाखिला नहीं मिल पाने को लेकर परेशान था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसी निराशा को उसकी मौत की संभावित वजह माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि छात्र ने महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 95.7% अंक हासिल किए थे। इतने अच्छे परिणाम के बाद उसके सामने आगे की पढ़ाई को लेकर कई उम्मीदें थीं, लेकिन उसे अपनी पसंद के संस्थान में प्रवेश नहीं मिल सका। इसके बाद वह कथित तौर पर काफी तनाव और निराशा में रहने लगा। परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह समझना बेहद मुश्किल है कि इतने शानदार अंक हासिल करने वाला एक किशोर इतनी बड़ी निराशा में कैसे चला गया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि छात्र के इस कदम के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और क्या कॉलेज में दाखिला न मिलना ही इसकी वजह थी। इसलिए इसे अंतिम कारण के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक और करियर संबंधी दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद मनचाहा कॉलेज या कोर्स न मिल पाना किसी छात्र के लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में परिवार, शिक्षक और दोस्तों का भावनात्मक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञ भी लंबे समय से छात्रों को यह समझाने पर जोर देते रहे हैं कि परीक्षा के अंक या किसी एक संस्थान में दाखिला जीवन की सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हैं।
महाराष्ट्र के ठाणे में सामने आया यह मामला परिवार और समाज दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह है कि बच्चों की पढ़ाई और करियर की चिंता के साथ-साथ उनकी मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी छात्र में लगातार तनाव, निराशा, खुद को अलग-थलग करना या भविष्य को लेकर अत्यधिक हताशा दिखाई दे तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय तुरंत भावनात्मक और पेशेवर मदद दिलाना जरूरी है।



