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भारतीयों के लिए अमेरिका से बड़ा झटका!

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अमेरिका में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक और चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित EB-1 ग्रीन कार्ड कैटेगरी का उपलब्ध कोटा मौजूदा वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले ही समाप्त हो सकता है। अमेरिकी वित्तीय वर्ष 30 सितंबर 2026 को खत्म हो रहा है। अगर भारत के लिए तय वीजा संख्या उससे पहले पूरी हो जाती है, तो बाकी वित्तीय वर्ष में इस कैटेगरी में नए ग्रीन कार्ड जारी करना अस्थायी रूप से रोकना पड़ सकता है।

EB-1 अमेरिका की रोजगार आधारित पहली प्राथमिकता वाली कैटेगरी है। इसमें असाधारण क्षमता वाले प्रोफेशनल्स, उत्कृष्ट प्रोफेसर और रिसर्चर तथा कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मैनेजर और एग्जीक्यूटिव शामिल होते हैं। यानी यह कैटेगरी सामान्य नौकरी आधारित इमिग्रेशन की तुलना में उच्च योग्यता और विशेष पेशेवर उपलब्धियों वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इस समय समस्या बढ़ती मांग और सीमित वीजा उपलब्धता को लेकर है। अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में रोजगार आधारित वीजा पर वार्षिक सीमा है और किसी एक देश के लिए भी सीमा निर्धारित है। भारत जैसे अधिक मांग वाले देश में बड़ी संख्या में योग्य आवेदक होने के कारण उपलब्ध संख्या जल्दी खत्म होने की स्थिति बनती रहती है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी कहा है कि भारत से EB-1 वीजा नंबरों के अधिक इस्तेमाल के कारण वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले कैटेगरी को ‘अनअवेलेबल’ करना पड़ सकता है।

सितंबर 2026 के वीजा बुलेटिन में भारतीय EB-1 आवेदकों के लिए Final Action Date 15 अक्टूबर 2022 है। इसका मतलब यह है कि ग्रीन कार्ड की अंतिम मंजूरी उन मामलों में प्राथमिकता की तारीख के आधार पर होती है जो इस कटऑफ के दायरे में आते हैं। यदि वीजा नंबरों का वार्षिक कोटा समाप्त हो जाता है, तो पात्र मामलों की मंजूरी भी उस समय तक रुक सकती है जब तक नई वित्तीय वर्ष में वीजा संख्या उपलब्ध न हो जाए।

यहां यह समझना जरूरी है कि EB-1 कैटेगरी के ‘अनअवेलेबल’ होने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारतीयों के लिए EB-1 ग्रीन कार्ड हमेशा के लिए बंद कर दिया है। यदि मौजूदा वित्तीय वर्ष का कोटा खत्म होता है, तो रोक अस्थायी होगी और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के बाद उपलब्धता फिर से तय की जाएगी। इसलिए जिन लोगों का मामला इस कैटेगरी में है, उनके लिए यह स्थायी प्रतिबंध से ज्यादा वीजा नंबरों की उपलब्धता से जुड़ी समस्या है।

भारतीय आवेदकों के लिए मुश्किल इसलिए भी बड़ी है क्योंकि रोजगार आधारित अन्य कैटेगरी में भी लंबा बैकलॉग बना हुआ है। EB-2 India पहले ही सितंबर के लिए ‘अनअवेलेबल’ हो चुका है, जबकि EB-3 India की Final Action Date 1 जनवरी 2014 तक पीछे है। इसका मतलब है कि भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका में स्थायी निवास हासिल करने की प्रक्रिया कई मामलों में बेहद लंबी हो चुकी है।

अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदक की ‘priority date’ बेहद महत्वपूर्ण होती है। वीजा उपलब्धता इसी तारीख और संबंधित रोजगार आधारित कैटेगरी के कटऑफ के आधार पर तय होती है। इसलिए EB-1 आवेदकों को अपने I-140, I-485 और priority date की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी। USCIS भी रोजगार आधारित मामलों में Visa Bulletin की संबंधित तारीखों के आधार पर आवेदन प्रक्रिया तय करता है।

भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए यह अपडेट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि EB-1 को अक्सर ग्रीन कार्ड हासिल करने के अपेक्षाकृत बेहतर रास्तों में माना जाता है। लेकिन भारत से आवेदकों की बड़ी संख्या और सीमित वार्षिक वीजा उपलब्धता के कारण इस कैटेगरी में भी दबाव लगातार बढ़ रहा है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख 30 सितंबर 2026 है। यदि उससे पहले भारत का EB-1 आवंटन समाप्त हो जाता है, तो भारतीय आवेदकों के लिए वीजा नंबरों की उपलब्धता अस्थायी रूप से रुक सकती है। नई वित्तीय वर्ष की शुरुआत 1 अक्टूबर से होने के बाद स्थिति फिर से नए आवंटन और अमेरिकी वीजा बुलेटिन के अनुसार तय होगी। इसलिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में शामिल भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं।

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