
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद तबाही का दायरा लगातार सामने आ रहा है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की PAGER प्रणाली ने प्रारंभिक आकलन में चेतावनी दी है कि इस आपदा में मृतकों की संख्या 10,000 से लेकर 1 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर केवल 32 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है, लेकिन मलबे में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका के कारण विशेषज्ञों ने भारी जनहानि की संभावना जताई है।
24 जून को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए। इन झटकों ने राजधानी कराकास समेत कई शहरों में इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचाया। कई बहुमंजिला भवन ढह गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और संचार तथा परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रहे हैं।
USGS की PAGER (Prompt Assessment of Global Earthquakes for Response) प्रणाली भूकंप के बाद संभावित मानवीय और आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाती है। इस प्रणाली के अनुसार मौजूदा भूकंप में “उच्च जनहानि और व्यापक क्षति” की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ढांचागत नुकसान होने के कारण मृतकों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। कराकास का प्रमुख हवाई अड्डा क्षतिग्रस्त होने के कारण बंद कर दिया गया है, जबकि मेट्रो और रेल सेवाओं को भी रोक दिया गया है। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स राहत कार्यों को और कठिन बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आ रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई विश्व नेताओं ने संवेदना व्यक्त करते हुए सहायता का भरोसा दिया है। अमेरिका, मेक्सिको, ब्राजील और अन्य देशों ने भी राहत सामग्री और बचाव दल भेजने की पेशकश की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे। जैसे-जैसे मलबे से लोगों को निकाला जाएगा और दूरदराज के क्षेत्रों से सूचनाएं आएंगी, वास्तविक नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा देश बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान में जुटा हुआ है।



