
भारत में सोने की मांग को बड़ा झटका लगा है। सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने के बाद देशभर में गोल्ड ज्वेलरी और निवेश के लिए सोने की खरीद में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में सोने की मांग करीब 70 प्रतिशत तक घट गई है। इस फैसले का असर सीधे तौर पर ग्राहकों, ज्वेलर्स और बुलियन कारोबारियों पर पड़ा है, जिससे बाजार में सुस्ती का माहौल बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में अचानक और रिकॉर्ड स्तर की बढ़ोतरी के कारण सोने की कीमतों में तेज उछाल आया है। पहले जहां आयात शुल्क 6 प्रतिशत था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह अब तक की सबसे बड़ी शुल्क वृद्धि में से एक है, जिसने घरेलू बाजार पर सीधा प्रभाव डाला है।
बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राहकों ने महंगे सोने की वजह से खरीदारी टालनी शुरू कर दी है। कई शहरों में ज्वेलरी शोरूम पर ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। जिन परिवारों ने शादी या अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए सोना खरीदने की योजना बनाई थी, वे अब या तो खरीदारी को टाल रहे हैं या कम वजन वाले आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि ग्राहक पहले जहां भारी ज्वेलरी खरीदते थे, अब हल्के और कम कीमत वाले विकल्प चुन रहे हैं।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, केवल आयात शुल्क ही नहीं बल्कि महंगाई, बढ़ती ईंधन कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की मांग पर असर डाल रहे हैं। ईरान संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता के कारण उपभोक्ताओं का खर्च करने का रुझान कमजोर हुआ है। ऐसे माहौल में सोने की बढ़ती कीमतों ने मांग को और ज्यादा प्रभावित किया है।
विश्व स्वर्ण परिषद ने अनुमान जताया है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो वर्ष 2026 में भारत की कुल सोना मांग 50 से 60 टन तक कम हो सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट होगी। परिषद का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से न केवल आधिकारिक मांग प्रभावित होगी बल्कि अवैध तस्करी और अनौपचारिक बाजारों को भी बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि अतीत में कई बार देखा गया है।
सोना कारोबार से जुड़े संगठनों ने सरकार से आयात शुल्क पर पुनर्विचार करने की मांग भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है और ऐसे में अत्यधिक शुल्क बाजार को अस्थिर कर सकता है। कई ज्वेलर्स का मानना है कि यदि मांग में यही गिरावट जारी रही तो छोटे कारोबारियों और कारीगरों की आय पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
उधर सरकार का मानना है कि सोने के आयात को नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव पड़ता है। हाल के महीनों में सोने के आयात में तेजी देखी गई थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन में बाजार किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या मांग में दोबारा सुधार देखने को मिलता है या नहीं।



