
देश में सोना और चांदी खरीदने वाले लोगों को अब बड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है, जिसके बाद आने वाले दिनों में ज्वेलरी और बुलियन की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वित्त मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक, गोल्ड और सिल्वर इम्पोर्ट पर प्रभावी शुल्क अब 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी को बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया है, जबकि इसके साथ 5 प्रतिशत कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) भी लागू रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत सिर्फ सोना और चांदी ही नहीं, बल्कि ज्वेलरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले छोटे पार्ट्स यानी “फाइंडिंग्स” पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है। सरकार ने गोल्ड और सिल्वर फाइंडिंग्स पर 5 प्रतिशत शुल्क तय किया है, जबकि प्लेटिनम फाइंडिंग्स पर 5.4 प्रतिशत ड्यूटी लागू होगी। इन फाइंडिंग्स में हुक, क्लैस्प, क्लैंप, पिन और स्क्रू बैक जैसे छोटे उपकरण शामिल होते हैं, जिनका इस्तेमाल आभूषणों को तैयार करने में किया जाता है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत में सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ने लगा था। सरकार का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ाने से अनावश्यक सोने की खरीद पर कुछ हद तक रोक लगेगी और विदेशी मुद्रा की बचत हो सकेगी।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे फिलहाल सोने की खरीद को टालें और विदेशी मुद्रा बचाने में सहयोग करें। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार अब आर्थिक मितव्ययता पर जोर दे रही है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का सीधा असर सर्राफा बाजार पर पड़ेगा। आयात महंगा होने से घरेलू बाजार में सोना और चांदी के दाम और बढ़ सकते हैं। पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में नई ड्यूटी लागू होने के बाद शादी-विवाह के सीजन में ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
हालांकि सरकार ने कुछ औद्योगिक और रीसाइक्लिंग से जुड़े आयातों को राहत भी दी है। कीमती धातुओं वाले “स्पेंट कैटेलिस्ट” और ऐश के आयात पर रियायती 4.35 प्रतिशत शुल्क रखा गया है, लेकिन इसके लिए सख्त पर्यावरण और अनुपालन नियम लागू किए गए हैं। सरकार चाहती है कि रीसाइक्लिंग और रिकवरी इंडस्ट्री को बढ़ावा मिले ताकि नए आयात पर निर्भरता कम हो सके।
उधर ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी से मांग प्रभावित हो सकती है और अवैध तस्करी का खतरा भी बढ़ सकता है। कुछ उद्योग संगठनों ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो आम उपभोक्ता हल्के वजन वाले गहनों की ओर रुख कर सकते हैं।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है और यहां त्योहारों तथा शादी-विवाह के मौसम में सोने की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार के इस फैसले का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम ग्राहकों, ज्वेलर्स और पूरे सर्राफा कारोबार पर भी दिखाई देगा। आने वाले दिनों में बाजार की प्रतिक्रिया और कीमतों में बदलाव पर सभी की नजर रहेगी।



