
अमेरिकी चुनाव नतीजों के बाद सोना-चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल!
सोना और चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। बुधवार, 4 नवंबर को सोने के भाव में करीब 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछाल आया, जबकि चांदी करीब 6,900 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में लगातार दबाव झेल रहे बुलियन बाजार में इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना कारोबार के दौरान करीब 2.08 फीसदी चढ़कर 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं चांदी के दिसंबर वायदा भाव में लगभग 3.55 फीसदी की तेजी आई और यह 1,86,081 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा, इसलिए ये आंकड़े उस समय के बाजार भाव हैं, अंतिम बंद भाव नहीं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड करीब 3 फीसदी उछलकर 4,046 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया। वहीं स्पॉट सिल्वर में लगभग 4.4 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव 51.99 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर में भी मजबूती देखने को मिली।
इस तेजी के पीछे अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को एक अहम वजह माना जा रहा है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल किया है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक एजेंडे और आगे की नीतियों को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
डॉलर में कमजोरी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया है। बुधवार को डॉलर इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली। आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग को समर्थन मिल सकता है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट भी सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि सोना खुद ब्याज नहीं देता।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी बाजार की तेजी से जुड़ा एक अन्य कारक है। तेल सस्ता होने से महंगाई बढ़ने की आशंका कुछ कम हो सकती है और इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों पर असर पड़ता है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की नीति को लेकर अनिश्चितता अभी बनी हुई है। महंगाई और रोजगार से जुड़े आंकड़े आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के नतीजों से कीमती धातुओं को निकट अवधि में समर्थन मिल सकता है, लेकिन सिर्फ राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर तेजी लंबे समय तक कायम रहने की गारंटी नहीं है। डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले और वैश्विक आर्थिक हालात पर बाजार की नजर रहेगी। चांदी में औद्योगिक मांग का असर भी होता है, इसलिए इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव संभव है।
अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि MCX के वायदा भाव और ज्वेलरी दुकानों के खुदरा भाव अलग-अलग हो सकते हैं। शहर, शुद्धता, स्थानीय मांग और ज्वेलर के हिसाब से कीमतों में अंतर रहता है। गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी जुड़ते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले 24, 22 और 18 कैरेट सोने के ताजा भाव के साथ चांदी की शुद्धता और प्रति किलोग्राम कीमत की पुष्टि जरूर कर लें।



