
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक इंडिगो में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी की ओर से जारी बयान के अनुसार उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। एल्बर्स के पद छोड़ने के बाद एयरलाइन के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया को अंतरिम रूप से कंपनी की कमान सौंपी गई है, जो नए सीईओ की नियुक्ति तक इंडिगो के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
बताया जा रहा है कि यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब इंडिगो हाल ही में अपने सबसे बड़े परिचालन संकट से गुजरी थी। दिसंबर 2025 में एयरलाइन को बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द और देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, जिससे हजारों यात्रियों को भारी परेशानी हुई थी और कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। रिपोर्टों के अनुसार उस दौरान हजारों उड़ानों के रद्द होने से भारत के विमानन क्षेत्र में भी व्यापक असर देखने को मिला और सरकार तथा नियामक एजेंसियों ने एयरलाइन की कार्यप्रणाली की जांच भी की थी।
इस संकट के बाद कंपनी पर दबाव बढ़ गया था और प्रबंधन स्तर पर सुधार की मांग उठने लगी थी। ऐसे माहौल में पीटर एल्बर्स का इस्तीफा इंडिगो के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। एल्बर्स ने 2022 में कंपनी के सीईओ का पद संभाला था और उस समय इंडिगो के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में कई योजनाएं शुरू की गई थीं। हालांकि हाल के परिचालन संकट और उससे पैदा हुए विवादों के कारण कंपनी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
इंडिगो के प्रबंधन ने कहा है कि राहुल भाटिया के नेतृत्व में कंपनी अब परिचालन स्थिरता और सेवा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देगी। भाटिया इंडिगो के संस्थापकों में से एक हैं और लंबे समय से कंपनी के रणनीतिक फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही है। उनके नेतृत्व में एयरलाइन का फोकस यात्रियों का भरोसा दोबारा जीतने और संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो भारत के विमानन बाजार में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी एयरलाइन है, इसलिए उसके नेतृत्व में कोई भी बदलाव पूरे एविएशन सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अब उद्योग जगत की नजर इस बात पर टिकी है कि कंपनी नए स्थायी सीईओ के रूप में किसे चुनती है और भविष्य में इंडिगो अपनी परिचालन व्यवस्था को किस तरह मजबूत करती है।
इसी बीच इंडिगो के इस बड़े फैसले ने भारतीय विमानन क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में कंपनी की नई रणनीति और नेतृत्व यह तय करेगा कि इंडिगो अपने हालिया संकट से कितनी जल्दी उबर पाती है और देश के तेजी से बढ़ते एविएशन बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख पाती है।


