
Stock Market Crash Signal: जापान से कोरिया तक बाजार में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने के बाद बुधवार यानी 7 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत से पहले विदेशी बाजारों से मिले संकेत कुछ कमजोर नजर आ रहे हैं। जापान से लेकर दक्षिण कोरिया और हांगकांग तक कई एशियाई बाजारों में दबाव दिखाई दिया है। इसी बीच भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेतक माने जाने वाला GIFT Nifty भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई।
इससे पहले मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय निवेशकों के लिए काफी शानदार रहा था। सेंसेक्स 685 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 73,067.81 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 220 अंक चढ़कर 22,776.10 पर पहुंच गया। दिनभर की इस तेजी से बाजार की कुल निवेशक संपत्ति में करीब 3.61 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था। अब सवाल यह है कि क्या बुधवार को वैश्विक बाजारों का दबाव इस तेजी पर ब्रेक लगा सकता है।
एशियाई बाजारों की बात करें तो बुधवार की सुबह जापान का निक्केई करीब 700 अंक से ज्यादा नीचे कारोबार करता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग में भी गिरावट दर्ज की गई, जबकि दक्षिण कोरिया के प्रमुख KOSPI इंडेक्स पर भी दबाव रहा। हालांकि अलग-अलग समय पर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया और कुछ एशियाई सूचकांकों में बाद में सुधार भी नजर आया। इसलिए शुरुआती कमजोरी को पूरे दिन के क्रैश की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।
भारतीय बाजार के लिए सबसे अहम संकेत GIFT Nifty से मिला। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक खबर तैयार किए जाने के समय GIFT Nifty 100 अंक से ज्यादा की गिरावट में था। दूसरे बाजार संकेतों में भी बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने की संभावना जताई गई। एक ताजा बाजार अपडेट में GIFT Nifty करीब 22,750-22,760 के आसपास था, जो पिछले बंद स्तर से नीचे था।
बाजार पर सिर्फ विदेशी शेयर बाजारों की चाल का असर नहीं रहेगा। बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC के फैसले पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। रेपो रेट और आगे की मौद्रिक नीति को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू स्तर पर RBI का फैसला भी कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।
इस समय कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई हैं। ताजा बाजार आंकड़ों में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में पहले से ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक 2026 में विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी से निकासी काफी ज्यादा रही है और सितंबर में निफ्टी की गिरावट एशियाई बाजारों में सबसे कमजोर प्रदर्शन में शामिल रही थी। इससे बाजार में किसी भी तेज रिकवरी के दौरान बिकवाली का दबाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि मंगलवार की तेजी को देखते हुए पूरी तस्वीर सिर्फ नकारात्मक भी नहीं है। अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे और S&P 500 तथा Nasdaq में मजबूती देखने को मिली। कुछ एशियाई बाजार भी शुरुआती कमजोरी के बावजूद पूरी तरह टूटे हुए नहीं थे। इसलिए बुधवार को भारतीय बाजार में शुरुआत कमजोर होने के बाद आगे की दिशा वैश्विक बाजारों, RBI के फैसले, कच्चे तेल और निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर 7 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए शुरुआती संकेत सावधानी वाले हैं। जापान और दक्षिण कोरिया समेत कुछ एशियाई बाजारों में कमजोरी और GIFT Nifty की गिरावट से सेंसेक्स-निफ्टी पर शुरुआती दबाव बन सकता है, लेकिन इसे सीधे शेयर बाजार के क्रैश की पुष्टि नहीं माना जा सकता। मंगलवार की तेज बढ़त के बाद निवेशक आज RBI के फैसले और वैश्विक संकेतों पर खास नजर रखेंगे।



