Advertisement
भारतलाइव अपडेट
Trending

भारत में 100% एथेनॉल ईंधन का नया दौर शुरू होने की तैयारी, इन शहरों में सबसे पहले मिलेगा ग्रीन फ्यूल

Advertisement
Advertisement

भारत में स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियां अब 100 प्रतिशत एथेनॉल (E100) ईंधन को चरणबद्ध तरीके से आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात में कमी लाना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। आने वाले वर्षों में देश के चुनिंदा शहरों में E100 ईंधन उपलब्ध कराया जाएगा, जहां फ्लेक्स-फ्यूल (Flex Fuel) तकनीक वाले वाहन इसका उपयोग कर सकेंगे।

एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। वर्तमान में भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि अब सरकार का फोकस उन वाहनों और इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने पर है जो 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो सकती है।

रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती चरण में दिल्ली, पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद और कुछ अन्य प्रमुख शहरों में E100 ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने की योजना है। इन शहरों का चयन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यहां वैकल्पिक ईंधन तकनीकों को अपनाने की क्षमता अधिक है और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग भी अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ सकता है। तेल कंपनियां पहले से ही कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल आधारित ईंधन उपलब्ध कराने के प्रयोग कर चुकी हैं।

सरकार का दावा है कि एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है। गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन उद्योग के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। यही वजह है कि केंद्र सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। पारंपरिक पेट्रोल और डीजल की तुलना में एथेनॉल अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इससे वायु प्रदूषण कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसके लिए बड़े पैमाने पर वाहन तकनीक में बदलाव और ईंधन वितरण नेटवर्क को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

ऑटोमोबाइल कंपनियां भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों के विकास पर तेजी से काम कर रही हैं। ऐसे वाहन पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर आसानी से चल सकते हैं। आने वाले समय में भारतीय बाजार में इस तकनीक से लैस दोपहिया और चारपहिया वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे उपभोक्ताओं को ईंधन के अधिक विकल्प मिलेंगे और ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन को देशभर में लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए पर्याप्त उत्पादन क्षमता, वितरण व्यवस्था, वाहन अनुकूलन और कीमतों के संतुलन जैसी कई चुनौतियों का समाधान करना होगा। फिर भी भारत दुनिया के उन देशों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो जैव ईंधन आधारित अर्थव्यवस्था को बड़े स्तर पर अपनाने का प्रयास कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन की शुरुआत भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। यदि यह योजना सफल होती है, तो इससे न केवल पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत किस गति से इस ग्रीन फ्यूल क्रांति को आगे बढ़ाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share