
भारत अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। ISRO के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. वेंकटेश्वर शर्मा ने एक कार्यक्रम के दौरान यह बड़ा खुलासा किया कि भारत 2027 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए ISRO लगातार तकनीकी और वैज्ञानिक स्तर पर मजबूत तैयारी कर रहा है। इससे भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना अंतरिक्ष स्टेशन है।
डॉ. शर्मा के अनुसार, इस साल भारत पहला मानव रहित अंतरिक्ष मिशन लॉन्च करने वाला है, जो आगे चलकर मानव अभियानों का रास्ता तय करेगा। यह मिशन ISRO की क्षमताओं की परीक्षा भी होगा और आने वाले मानव मिशन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भारत मानवयुक्त अंतरिक्ष यात्रा में एक निर्णायक कदम आगे बढ़ा देगा। यह ‘गगनयान’ जैसी परियोजनाओं के लिए तकनीकी रूप से बड़ा समर्थन प्रदान करेगा।
उन्होंने आगे बताया कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी की कक्षा में वैज्ञानिक शोध, ऊर्जा, मेडिकल विज्ञान, अंतरिक्ष निर्माण और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण आधारित प्रयोगों को आगे बढ़ाना होगा। यह स्टेशन भारतीय वैज्ञानिकों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर दीर्घकालिक शोध करने का अवसर देगा। साथ ही, यह अंतरिक्ष में भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा ताकि किसी अन्य देश की प्रयोगशालाओं या स्टेशनों पर निर्भरता न रहे।
ISRO पहले से ही मॉड्यूल-आधारित स्टेशन के डिजाइन और उसके प्रक्षेपण के लिए आवश्यक रॉकेट तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। इसके लिए LVM3 जैसे भारी रॉकेटों की क्षमताओं को बढ़ाया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नई तकनीकी प्रगति और निजी अंतरिक्ष कंपनियों के साथ सहयोग से यह लक्ष्य समय पर हासिल करना संभव है।
भारत का यह कदम न केवल अंतरिक्ष विज्ञान में उसकी स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारत की क्षमता को भी प्रदर्शित करेगा कि वह दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयार है। 2027 में अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना भारत के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी और अंतरिक्ष अनुसंधान का एक नया अध्याय भी खोलेगा।



