
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। गाजीपुर पुलिस ने उनके खिलाफ शस्त्र लाइसेंस से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में नया मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान उनके हथियार के लाइसेंस से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज रिकॉर्ड रूम से गायब पाए गए, जिसके बाद मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े हथियार लाइसेंसों की व्यापक जांच अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि कई वर्ष पहले अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस पर अरुणाचल प्रदेश के आलोंग क्षेत्र में एक एनपीबी राइफल की खरीद और बाद में उसकी बिक्री दर्ज की गई थी। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया से संबंधित मूल फाइल और रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं हैं। इतना ही नहीं, संबंधित हथियार की वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का आरोप है कि इन दस्तावेजों को जानबूझकर गायब किया गया हो सकता है, जिसके चलते अफजाल अंसारी के साथ तत्कालीन शस्त्र लिपिकों के खिलाफ भी धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गाजीपुर पुलिस का कहना है कि यह पिछले एक सप्ताह के भीतर अफजाल अंसारी के खिलाफ दर्ज तीसरी एफआईआर है, जबकि मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। डीआईजी वाराणसी रेंज के निर्देश पर विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत मुख्तार अंसारी के परिवार, सहयोगियों और कथित गैंग से जुड़े लोगों के शस्त्र लाइसेंसों तथा उनसे खरीदे और बेचे गए हथियारों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। जांच टीम उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के दौरान कई लाइसेंसों की मूल फाइलें और हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज गायब मिले हैं। इसी कारण पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिकॉर्ड कैसे गायब हुए और क्या किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या नियमों का उल्लंघन हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों, जांच में मिले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जा रही है तथा किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात नहीं किया जा रहा। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल इस मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर पुलिस शस्त्र लाइसेंसों से जुड़े रिकॉर्ड की व्यापक जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे लेकर आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, फोरेंसिक और दस्तावेजी साक्ष्यों की समीक्षा तथा अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी। यदि जांच में और नए तथ्य सामने आते हैं तो यह मामला केवल एक शस्त्र लाइसेंस विवाद तक सीमित न रहकर व्यापक प्रशासनिक और कानूनी जांच का विषय भी बन सकता है।



