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अरुणाचल से LAC तक चीन से अहम बातचीत

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर मंगलवार को बीजिंग में बेहद अहम बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में आमने-सामने होंगे। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश पिछले कुछ वर्षों के तनाव के बाद संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर स्थिति और सीमा विवाद अब भी दोनों देशों के रिश्तों का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

अजित डोभाल 2 दिवसीय चीन दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं। भारत की ओर से वे सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधि हैं, जबकि चीन की तरफ से वांग यी इस तंत्र के विशेष प्रतिनिधि हैं। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में सीमा विवाद के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होने की संभावना है। विशेष प्रतिनिधि तंत्र को भारत-चीन सीमा विवाद पर राजनीतिक स्तर पर बातचीत के प्रमुख माध्यमों में से एक माना जाता है।

इस वार्ता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत और चीन के बीच 2020 के बाद लंबे समय तक गंभीर सैन्य तनाव रहा। गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच सैनिकों की तैनाती बढ़ी और कई इलाकों में लंबे समय तक गतिरोध बना रहा। हालांकि बाद के वर्षों में सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश हुई। अब दोनों पक्ष सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं।

पिछले साल 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता दिल्ली में हुई थी। चीन के अनुसार, उस बातचीत में दोनों पक्षों ने सीमा प्रश्न पर स्पष्ट और विस्तृत चर्चा की थी तथा कई मुद्दों पर साझा समझ बनाने की कोशिश की गई थी। अब 25वें दौर में उन्हीं प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।

अरुणाचल प्रदेश भी इस पूरी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत और चीन के बीच बयानबाजी देखने को मिली है। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है और इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है, जबकि भारत लगातार स्पष्ट करता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में सीमा पर किसी भी तरह की गतिविधि या बयान दोनों देशों के बीच संवेदनशीलता बढ़ा सकता है।

हाल में भारत ने अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के आधिकारिक नामों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया था। चीन ने इस कदम का विरोध किया था। इसके बाद सीमा क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने मौजूदा भारत-चीन सीमा स्थिति को सामान्य तौर पर स्थिर बताया है, वहीं भारत ने भी सीमा से जुड़े मामलों को बेहद गंभीर बताते हुए LAC पर शांति और स्थिरता को प्राथमिकता दी है।

भारत के लिए LAC पर शांति केवल सीमा सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पूरे भारत-चीन संबंधों से है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता जरूरी है। यही वजह है कि डोभाल और वांग यी की बैठक में सीमा प्रबंधन, सैन्य तनाव को रोकने के उपाय और भविष्य में किसी नए टकराव की स्थिति पैदा न होने देने के लिए संवाद तंत्र को मजबूत करना महत्वपूर्ण विषय हो सकते हैं।

इस वार्ता का एक बड़ा कूटनीतिक संदर्भ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा भी है। शी के सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि उनकी यात्रा की अंतिम पुष्टि अभी बाकी बताई गई है। यदि यह यात्रा होती है तो 2020 के बाद भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। डोभाल-वांग वार्ता ऐसे उच्चस्तरीय संपर्क के लिए माहौल तैयार करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़ा है और इसका स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। 2003 में विशेष प्रतिनिधि तंत्र स्थापित किया गया था ताकि सीमा प्रश्न के व्यापक राजनीतिक समाधान की दिशा में काम किया जा सके। समय के साथ यह तंत्र दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के अलावा व्यापक रणनीतिक संवाद का भी महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

हालांकि इस बैठक से तत्काल सीमा विवाद का अंतिम समाधान निकलने की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर लंबे समय से अलग-अलग दावे और रणनीतिक चिंताएं मौजूद हैं। इसलिए बातचीत का तत्काल उद्देश्य सीमा पर स्थिरता बनाए रखना, सैन्य तनाव की पुनरावृत्ति रोकना और दोनों देशों के बीच संवाद को लगातार जारी रखना अधिक व्यावहारिक लक्ष्य हो सकता है।

फिलहाल अजित डोभाल और वांग यी की 25वें दौर की बातचीत पर भारत और चीन दोनों की नजरें हैं। अगर बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ती है और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए ठोस समझ बनती है, तो इससे दोनों देशों के संबंधों में आगे सुधार की राह खुल सकती है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, LAC और सीमा से जुड़े अन्य संवेदनशील मुद्दों पर दोनों देशों के रुख से यह भी स्पष्ट होगा कि हाल के वर्षों के तनाव के बाद भारत-चीन संबंध वास्तव में किस दिशा में बढ़ रहे हैं।

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