
उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और बीजेपी के बीच बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर बड़ा दावा किया है। कानपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव खुद उनसे भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए मिले थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और नेताओं के बीच मुलाकातों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं शुरू हुई थीं। इसी दौरान जब केशव प्रसाद मौर्य से राकेश सचान के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पलटकर अखिलेश यादव को लेकर यह दावा कर दिया। मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव उनसे बीजेपी में शामिल होने के लिए मिले थे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि कथित मुलाकात कब, कहां और किन परिस्थितियों में हुई थी।
केशव मौर्य के इस बयान को फिलहाल उनके राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी में अखिलेश यादव की ओर से ऐसी किसी मुलाकात या बीजेपी में शामिल होने की इच्छा के संबंध में पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। खास बात यह है कि अखिलेश यादव हाल में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के मौजूदा गठबंधन को जारी रखने की बात कह चुके हैं।
मौर्य का यह बयान उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले आया है। राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। इससे पहले मौर्य ने दावा किया था कि सपा के 25 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। अखिलेश यादव ने इस दावे को खारिज करते हुए बीजेपी पर विधायकों को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
केशव प्रसाद मौर्य ने इसी दौरान समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले पर भी निशाना साधा। उन्होंने PDA को तंज के तौर पर ‘परिवार डेवलपमेंट एजेंसी’ बताया और सपा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। मौर्य का आरोप है कि सपा का PDA गुंडों, अपराधियों, माफिया और दंगाइयों को संरक्षण देने वाला मंच है। ये आरोप मौर्य की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें सपा का आधिकारिक पक्ष नहीं माना जा सकता।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी केशव मौर्य ने बीजेपी के पक्ष में दावा किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी। वहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधा। हालांकि चुनाव से जुड़े ये बयान मौर्य के राजनीतिक दावे हैं और इन्हें भविष्य के स्थापित परिणाम के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने हाल ही में साफ किया है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी मौजूदा विपक्षी गठबंधन के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ जिस गठबंधन ने चुनाव लड़ा था, वही गठबंधन 2027 में भी जारी रहेगा। ऐसे में मौर्य के ताजा दावे और अखिलेश यादव के सार्वजनिक रूप से बताए गए राजनीतिक रुख के बीच अंतर नजर आता है।
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार बढ़ रही है। दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे के नेताओं, रणनीतियों और गठबंधन को लेकर बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी बड़े नेता के कथित रूप से दूसरे दल में जाने या संपर्क में होने का दावा राजनीतिक चर्चा को और तेज कर देता है।
फिलहाल केशव प्रसाद मौर्य के अखिलेश यादव को लेकर किए गए दावे पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इस खास आरोप का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए कथित मुलाकात की परिस्थितियों और मौर्य के दावे की पुष्टि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में अगर अखिलेश यादव या सपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आती है, तो इस राजनीतिक विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।



