
नेताजी पर टिप्पणी पड़ी भारी, BJP सांसद अनंत महाराज से छीना गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान
पश्चिम बंगाल सरकार ने BJP सांसद अनंत महाराज से ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने का फैसला किया है। यह कार्रवाई नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर उनकी कथित टिप्पणी के बाद की गई, जिसके चलते राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अनंत महाराज, जिनका नाम नागेंद्र रॉय भी है और जो राज्यसभा सदस्य हैं, ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं। इन बयानों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद तेज हो गया और उनके खिलाफ आलोचना शुरू हो गई। इसी विवाद के बीच राज्य सरकार ने उन्हें दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने का निर्णय लिया। यह सम्मान उन्हें इसी साल फरवरी में दिया गया था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सबसे सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाते हैं। इसलिए उनसे और आजाद हिंद फौज से जुड़ी किसी भी टिप्पणी का राजनीतिक और सामाजिक असर काफी बड़ा होता है। अनंत महाराज के बयान सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। राज्य में इस मुद्दे ने जल्द ही राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विवादित टिप्पणियों के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया। ‘बंग विभूषण’ पश्चिम बंगाल सरकार का एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है और इसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए दिया जाता है। अनंत महाराज को यह सम्मान मिलने के कुछ ही महीनों बाद इसे वापस लेने का फैसला राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
इस पूरे मामले ने BJP के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। अनंत महाराज पश्चिम बंगाल की राजनीति में राजबंशी समुदाय के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं और कूचबिहार क्षेत्र में उनकी अलग राजनीतिक पहचान है। नेताजी को लेकर उनके बयान के बाद पार्टी के भीतर भी असहमति की आवाजें सामने आईं। वरिष्ठ नेता तथागत रॉय ने भी इस विवाद को लेकर BJP नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और कहा था कि नेताजी जैसे राष्ट्रीय नायक के प्रति अपमानजनक टिप्पणी का राजनीतिक असर पड़ सकता है।
अनंत महाराज के बयान के बाद विवाद केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान को लेकर लोगों ने अपनी नाराजगी जताई और विवादित टिप्पणी की आलोचना की। इसके बाद राज्य सरकार का सम्मान वापस लेने का फैसला सामने आया।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में नेताजी की विरासत राजनीतिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर बेहद अहम है। अलग-अलग राजनीतिक दल समय-समय पर नेताजी के विचारों और उनके योगदान को लेकर अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करते रहे हैं। ऐसे में एक मौजूदा सांसद की टिप्पणी और उसके बाद सम्मान वापस लेने की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
फिलहाल अनंत महाराज से ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने के फैसले के बाद इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अनंत महाराज अपनी टिप्पणियों और सम्मान वापस लिए जाने के फैसले पर आगे क्या प्रतिक्रिया देते हैं। साथ ही, यह विवाद आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेताजी की विरासत और राष्ट्रीय नायकों के सम्मान से जुड़े मुद्दे को और प्रमुख बना सकता है।



