
बांग्लादेश में 2026 का संसदीय चुनाव देश की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग सत्ता में नहीं है और राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। इस बार मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच देखा जा रहा है।
BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) इस चुनाव में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पार्टी का नेतृत्व तारिक रहमान कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। BNP ने अपने चुनाव अभियान में आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार पर रोक, महंगाई नियंत्रण और शासन में स्थिरता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। पार्टी का दावा है कि वह देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेगी और प्रशासनिक सुधार लाएगी।
वहीं जमात-ए-इस्लामी भी इस बार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है। पार्टी ने अन्य दलों के साथ गठबंधन कर चुनावी रणनीति तैयार की है। जमात अपने अभियान में नैतिक राजनीति, भ्रष्टाचार विरोध और धार्मिक मूल्यों पर आधारित शासन की बात कर रही है। हालाँकि, चुनाव के दौरान कुछ स्थानों पर समर्थकों के बीच झड़प और तनाव की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे राजनीतिक माहौल संवेदनशील बना हुआ है।
यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें पारंपरिक राजनीतिक समीकरण बदले हुए दिखाई दे रहे हैं। अवामी लीग की अनुपस्थिति ने विपक्षी दलों के लिए बड़ा अवसर पैदा किया है। शुरुआती रुझानों में दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है, जिससे परिणाम को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश चुनाव 2026 को देश की लोकतांत्रिक दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है। इसके नतीजे न केवल घरेलू राजनीति बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।



