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दिल्ली में दुनिया के बड़े नेताओं का जमावड़ा

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भारत की राजधानी दिल्ली इस समय वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनी हुई है। भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए दुनिया के कई बड़े नेता और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख दिल्ली पहुंच रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के राजधानी पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम है। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के अलावा पार्टनर और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में करीब 25 प्रमुख नेता और प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। पुतिन शुक्रवार तड़के पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जिसके बाद उनके संभावित ठहरने वाले स्थान और आवागमन के रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। रूसी राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। उनके काफिले की आवाजाही के दौरान कई इलाकों में विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहेगा।

अब सबकी नजर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर टिकी है। रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचेंगे। उनकी यह यात्रा भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित मुलाकात और बातचीत को खास महत्व दिया जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, सीमा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर बातचीत होने की संभावना पर दुनिया की नजर रहेगी।

BRICS सम्मेलन में रूस और चीन के अलावा कई अन्य देशों के शीर्ष नेता भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। Aaj Tak के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद समेत कई प्रमुख नेता इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी सम्मेलन के महत्व को बढ़ा रही है।

इस बार BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। संगठन के विस्तार के बाद इसके भीतर अलग-अलग देशों के हित और प्राथमिकताएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में भारत के सामने विभिन्न सदस्य देशों के बीच साझा सहमति बनाने और वैश्विक मुद्दों पर BRICS की भूमिका को मजबूत करने की चुनौती होगी।

भारत के लिए यह सम्मेलन कूटनीतिक रूप से बेहद अहम है। नई दिल्ली को रूस और चीन जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ अपने संबंधों को संभालने के साथ-साथ पश्चिमी देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी संतुलित करना है। BRICS के मंच पर भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज, विकासशील देशों की प्राथमिकताओं, आर्थिक सहयोग, तकनीक, व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे सकता है। ऐसे में सम्मेलन से निकलने वाला संयुक्त घोषणापत्र और विभिन्न नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत भारत की विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई विदेशी नेताओं के साथ मुलाकातों पर भी खास नजर रहेगी। मोदी-पुतिन वार्ता में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं, जबकि मोदी-जिनपिंग बातचीत में भारत-चीन संबंधों के साथ व्यापार और सीमा से जुड़े विषयों पर चर्चा की संभावना है। हालांकि किसी भी बैठक के एजेंडे और नतीजे की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही उसके बारे में अंतिम रूप से कहा जा सकेगा।

BRICS के विस्तार ने इस संगठन को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। नए सदस्य देशों और पार्टनर देशों की बढ़ती भागीदारी के बीच दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन भारत को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर देता है। अगले दो दिनों में राजधानी में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों पर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की नजर रहेगी। खास तौर पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग के बीच होने वाली संभावित बातचीत और BRICS की ओर से वैश्विक मुद्दों पर सामने आने वाला रुख इस सम्मेलन की सबसे बड़ी सुर्खियां बन सकता है।

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