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ट्रंप-पेजेशकियन शांति समझौते पर पाकिस्तान ने बजाई अपनी कूटनीतिक सफलता की ढोल

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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते के बाद न केवल मध्य पूर्व की राजनीति में नई हलचल पैदा हुई है, बल्कि पाकिस्तान भी खुद को इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण सूत्रधार बताने में जुट गया है। समझौते के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसका स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता की दिशा में अहम उपलब्धि बताया।

रिपोर्टों के अनुसार यह 14 बिंदुओं वाला समझौता अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव को समाप्त करने, तनाव कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता खोलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समझौते में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने, युद्धविराम लागू करने तथा आर्थिक प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर आगे बातचीत की रूपरेखा तय की गई है। समझौते पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की डिजिटल मंजूरी को एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

पाकिस्तान सरकार का दावा है कि इस समझौते को संभव बनाने में उसकी मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे पहले भी इस्लामाबाद लगातार यह संकेत देता रहा था कि वह वाशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद बहाल कराने के प्रयासों में शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के संपर्कों को लेकर भी कई रिपोर्टें सामने आई थीं, जिनमें कहा गया था कि दोनों पक्षों के बीच भरोसा कायम करने में पाकिस्तान ने पर्दे के पीछे सक्रिय भूमिका निभाई।

शहबाज शरीफ ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि संवाद और कूटनीति ही क्षेत्रीय संघर्षों का स्थायी समाधान है। पाकिस्तान इस घटनाक्रम को अपनी विदेश नीति की सफलता के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया और सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस समझौते से न केवल मध्य पूर्व में तनाव कम होगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को भी राहत मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और पिछले महीनों में यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। समझौते के बाद ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे तेल आयात करने वाले देशों को भी राहत मिल सकती है।

हालांकि इस समझौते को लेकर सभी पक्ष पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। कुछ आलोचकों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर अभी भी स्पष्ट समाधान नहीं निकला है। इसलिए यह समझौता अंतिम समाधान के बजाय आगे की बातचीत का एक प्रारंभिक ढांचा माना जा रहा है। इसके बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच वर्षों बाद किसी औपचारिक सहमति का बनना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता के बीच यह समझौता आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं पाकिस्तान इस अवसर का उपयोग खुद को एक प्रभावी मध्यस्थ और क्षेत्रीय शांति के समर्थक देश के रूप में स्थापित करने के लिए करता दिखाई दे रहा है।

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