
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने दो गुप्त ड्रग निर्माण प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। इन लैब से भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, रसायन और उपकरण बरामद किए गए हैं। मामले में एक विदेशी नागरिक समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अहम सफलता बताया।
एनसीबी के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर गौतम बुद्ध नगर जिले के जहानाबाद कदलपुर गांव में की गई। जांच एजेंसी को यहां किराये की जगहों पर कथित तौर पर सिंथेटिक ड्रग्स बनाने और उनकी प्रोसेसिंग के लिए प्रयोगशालाएं चलाए जाने की सूचना मिली थी। छापेमारी के दौरान दोनों स्थानों पर रासायनिक पदार्थों को संसाधित करने और ड्रग्स तैयार करने से जुड़े उपकरण मिले।
कार्रवाई में कुल 379.740 किलोग्राम एम्फेटामाइन युक्त सामग्री और 10 किलोग्राम स्यूडोएफेड्रिन जब्त की गई। एजेंसी का अनुमान है कि बरामद क्रिस्टलीय और अर्ध-क्रिस्टलीय सामग्री से करीब 56 किलोग्राम तैयार क्रिस्टलीय एम्फेटामाइन बनाई जा सकती थी। इसकी अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई रसायन और प्रयोगशाला के उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डेस्टिनी अब्राहम डंबिरी और मिजोरम की निवासी लल्लावमजुआली के रूप में बताई गई है। डंबिरी ने खुद को नाइजीरियाई नागरिक बताया है। हालांकि, एनसीबी के मुताबिक, आव्रजन रिकॉर्ड में उनकी भारत में एंट्री जनवरी 2020 में फ्रांसिस कालोकोह नाम से सिएरा लियोन के नागरिक के रूप में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी इस पहचान और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि गुप्त ड्रग प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ करना और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़ी सामग्री जब्त करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इसे खुफिया जानकारी के आधार पर की गई प्रभावी कार्रवाई का उदाहरण बताया। शाह ने नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
एनसीबी की जांच का अगला अहम पहलू यह पता लगाना है कि इन प्रयोगशालाओं में तैयार किए जा रहे पदार्थों की आपूर्ति कहां की जाती थी और इनके पीछे कौन लोग या नेटवर्क काम कर रहे थे। एजेंसी रसायनों की खरीद, आर्थिक लेनदेन, ड्रग्स की संभावित सप्लाई चेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच में अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संपर्क सामने आने पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में पहले भी सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के सामने केवल तैयार नशीले पदार्थों को जब्त करने की चुनौती नहीं होती, बल्कि उनके निर्माण, वित्तपोषण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी होता है। ताजा कार्रवाई इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर अवैध ड्रग निर्माण और तस्करी के खिलाफ निगरानी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लैब का संचालन कितने समय से हो रहा था और इनके जरिए नशीले पदार्थों की आपूर्ति किन इलाकों तक की जा रही थी। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।


