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GST के नए नियम से ट्रक चालकों और कारोबारियों को राहत!

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मालवाहक वाहनों की आवाजाही को आसान बनाने और कारोबारियों को रास्ते में होने वाली अनावश्यक जांच से राहत देने के लिए जीएसटी नियमों में अहम बदलाव की तैयारी है। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में की गई सिफारिशों के मुताबिक, माल ले जा रहे वाहनों को सामान्य तौर पर केवल उस राज्य में जांच के लिए रोका जा सकेगा, जहां से माल भेजा गया है या जहां उसे पहुंचना है। बीच में पड़ने वाले राज्यों के अधिकारियों की नियमित जांच करने की शक्ति सीमित करने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किसी वाहन को रोकने के लिए सिर्फ सामान्य या रूटीन जांच पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए विशिष्ट खुफिया जानकारी या ठोस इनपुट होना जरूरी होगा। साथ ही, कार्रवाई से पहले संयुक्त आयुक्त यानी जॉइंट कमिश्नर रैंक से कम नहीं होने वाले अधिकारी की अनुमति लेनी होगी। इसका उद्देश्य जांच के नाम पर वाहनों को बार-बार रोकने और कारोबारियों को होने वाली परेशानी को कम करना है।

फिलहाल, रास्ते में पड़ने वाले राज्यों के जीएसटी अधिकारी भी अपने अधिकार क्षेत्र से गुजर रहे मालवाहक वाहनों को रोककर दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। नए प्रस्ताव लागू होने पर दिल्ली से पंजाब जा रहे किसी ट्रक को केवल हरियाणा से गुजरने के कारण वहां नियमित जांच के लिए रोकने की कार्रवाई पर सवाल उठाया जा सकेगा, बशर्ते नियमों में निर्धारित अपवाद लागू न हों।

जीएसटी व्यवस्था में ई-वे बिल भी अहम दस्तावेज है। सामान्य तौर पर 50,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के माल की आवाजाही के लिए निर्धारित शर्तों के अनुसार ई-वे बिल जरूरी होता है। नई व्यवस्था में भी ई-वे बिल और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच जारी रहेगी। माल की जानकारी और दस्तावेजों का मिलान इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के माध्यम से किया जा सकेगा।

हालांकि, दस्तावेजों से जुड़ी कुछ गंभीर कमियों के मामलों में अपवाद रखा गया है। यदि माल के लिए ई-वे बिल नहीं बनाया गया है या वाहन में माल के स्रोत अथवा गंतव्य को दर्शाने वाले जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं हैं, तो निर्धारित प्रावधानों के तहत रास्ते में पड़ने वाले राज्य के अधिकारी भी माल की जांच, उसे रोकने या जब्त करने की कार्रवाई कर सकेंगे।

इन बदलावों के पीछे मुख्य उद्देश्य माल की ढुलाई को सुगम बनाना, परिवहन में लगने वाला समय घटाना और कारोबारियों के लिए नियमों को अधिक स्पष्ट बनाना है। बार-बार जांच होने से ट्रकों की आवाजाही में देरी होती है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था और परिवहन लागत प्रभावित हो सकती है। नई व्यवस्था से ऐसी बाधाओं को कम करने की उम्मीद है।

जीएसटी परिषद ने संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन की सिफारिश की है। इसलिए इन बदलावों को लागू करने की प्रक्रिया और प्रभावी तारीख के लिए संबंधित अधिसूचना पर नजर रखना जरूरी होगा। नियम लागू होने के बाद माल भेजने वाले और माल प्राप्त करने वाले राज्यों की भूमिका अधिक स्पष्ट होगी, जबकि केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों की नियमित जांच की शक्ति सीमित हो जाएगी।

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