
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यूसमर्ग के कोराग इलाके में चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान-आधारित आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों के मुताबिक, मुठभेड़ के बाद तलाशी अभियान में मूसा का शव और युद्ध जैसे सामान बरामद किए गए। अभियान में भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ शामिल थे।
सुरक्षाबलों के मुताबिक, ऑपरेशन कोराग को मंगलवार को विशेष खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किया गया था। यूसमर्ग के ऊंचाई वाले और घने जंगल वाले इलाके में तलाशी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि नजर आई। सुरक्षाबलों ने जब संदिग्धों को चुनौती दी तो आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई। इसी दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया। बाद में पालमेदान इलाके में तलाशी के दौरान उसकी पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई।
हाशिम मूसा को सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख ऑपरेटिव मानती रही हैं। उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, उसका ऑपरेशनल नेटवर्क पीर पंजाल क्षेत्र से लेकर कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ था। पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों में उसकी गतिविधियों को ट्रैक करना सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता था।
मूसा का नाम अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी सामने आया था। उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी सूचना देने पर 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच में भी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी नेटवर्क की भूमिका का उल्लेख किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, मोहम्मद आसिफ पहले पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप यानी SSG में पैरा-कमांडो के तौर पर काम कर चुका था। रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य सेवा छोड़ने के बाद वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा और बाद में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हुआ। उसकी सैन्य ट्रेनिंग को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां उसे प्रशिक्षित और अनुभवी ऑपरेटिव के तौर पर ट्रैक कर रही थीं।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि मूसा पाकिस्तान सेना में करीब 23 साल तक रहा था और उसके कार्यकाल के दौरान उसे पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा व्यवस्था से भी जोड़ा गया था। हालांकि, उसकी सैन्य सेवा और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी विस्तृत जानकारियां मुख्य रूप से सुरक्षा सूत्रों और जांच से सामने आई हैं। इन दावों के अलग-अलग हिस्सों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड के स्तर पर अलग-अलग हो सकती है।
मूसा के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कई अन्य हमलों से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पीर पंजाल के दोनों ओर सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जोड़कर देखा था। उसके एक सहयोगी यासिर के 5 सितंबर को यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाके में मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र में अभियान और तेज किया था। इसके बाद विशेष सूचना के आधार पर कोराग इलाके में यह अभियान चलाया गया।
मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान जारी रखा। अधिकारियों के अनुसार, जंगल और ऊंचाई वाले क्षेत्र में किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तलाशी के दौरान मूसा के शव के साथ हथियार और अन्य युद्ध संबंधी सामान बरामद होने की जानकारी दी गई है।
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क, संपर्कों और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने पर भी ध्यान दे सकती हैं। पहलगाम हमले और अन्य आतंकी घटनाओं की जांच में उसके नाम का सामने आना इस अभियान को सुरक्षा और जांच दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है। फिलहाल बडगाम के यूसमर्ग क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी रहने की जानकारी है।



