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भारत और न्यूजीलैंड ने समुद्री सुरक्षा व रक्षा सहयोग को दी नई मजबूती

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान भारत और न्यूजीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए रक्षा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों की ओर से जारी संयुक्त बयान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयास और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने पर जोर दिया गया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया, जिसे द्विपक्षीय रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और न्यूजीलैंड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला, समावेशी और सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे। दोनों देश समुद्री कानूनों के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहेंगे। इसके अलावा समुद्री निगरानी, क्षमता निर्माण, संयुक्त अभ्यास और रक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में यह साझेदारी दोनों देशों के रणनीतिक हितों को मजबूत करेगी।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, कृषि, पर्यटन और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के लिए व्यापारिक अवसरों का विस्तार किया जाएगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नया अध्याय माना जा रहा है, जिससे व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और साझा हितों के आधार पर अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहे हैं। वहीं न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग आने वाले वर्षों में और गहरा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए समन्वय बढ़ाएंगे।

यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड का दौरा किया है। इस यात्रा ने दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई गति देने का काम किया है। विश्लेषकों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक महत्व को देखते हुए भारत और न्यूजीलैंड की यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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