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India Today AI समिट में OpenAI के चीफ इकॉनॉमिस्ट ने कहा

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नई दिल्ली में चल रहे India AI Impact Summit 2026 के मंच से AI के विकास, उसके सामाजिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियों पर दुनिया के शीर्ष विशेषज्ञों ने विस्तृत चर्चा की। इस समिट में प्रमुख रूप से OpenAI के चीफ इकॉनॉमिस्ट डॉ. एरॉन चटर्जी ने अपने विचार व्यक्त किए, जो भारत के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक कोई वैश्विक बुलबुला नहीं है बल्कि यह टेक्नोलॉजी का रियल शिफ्ट है, जो आने वाले दशक में आर्थिक और सामाजिक ढांचे को बदलेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI केवल नौकरियों को “छीनने” वाला नहीं है, बल्कि वह उन लोगों से रोजगार “छीनता” है जो AI का उपयोग करना नहीं जानते। इसलिए भारत को AI शिक्षा और कौशल विकास पर जोर देना चाहिए ताकि तकनीक का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

डॉ. चटर्जी ने बताया कि भारत आज AI के उपयोग और यूज़र बेस की दृष्टि से दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते बाजारों में से एक बन चुका है। OpenAI के प्लेटफॉर्म पर लगभग 900 मिलियन सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और भारत इसका एक बड़ा केंद्र बन रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, डेटा की उपलब्धता और सॉफ्टवेयर कौशल इस देश को AI नवाचार के लिए मजबूत मंच प्रदान करती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भारत सिर्फ सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहेगा और हार्डवेयर निर्माण, कंप्यूटिंग पावर तथा ऊर्जा निवेश को नजरअंदाज करेगा, तो AI की दुनिया में वास्तविक नेतृत्व हासिल करना मुश्किल होगा। इसलिए भारत को हार्डवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा नेटवर्क पर भी समान रूप से फोकस करना होगा।

समिट में AI के रोजगार पर प्रभाव का विषय भी गहराई से उठाया गया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर AI-से नौकरियों के खत्म होने के प्रमाण नहीं मिले हैं, बल्कि यह तकनीक लोगों को अधिक उत्पादक बनाती है। कम कौशल वाले काम भी AI की सहायता से सुधर रहे हैं, जिससे कई नए व्यवसायिक अवसर भी उभर रहे हैं। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कंपनियाँ AI अपनाने में पीछे रह जाती हैं, तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएँगी।

AI-सम्बन्धित शिक्षा और नीति पर भी जोर दिया गया। डॉ. चटर्जी ने कहा कि AI को सीखने का उपकरण बनाना चाहिए, सोचने का विकल्प नहीं। बच्चों, युवा पेशेवरों और शिक्षकों को AI के सही इस्तेमाल, नैतिकता और सुरक्षा के पक्षों पर मार्गदर्शन देना आवश्यक है ताकि तकनीक का दुरुपयोग और ग़लतफहमियाँ कम हों। OpenAI ने सेफ्टी ब्लूप्रिंट भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य AI निर्माण और उपयोग को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

समिट के दौरान कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में AI के उपयोग के व्यापक उदाहरण भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि जैसे परंपरागत क्षेत्रों में AI मददगार साबित हो सकता है, उदाहरण स्वरूप AI तकनीक किसानों को मौसम, मिट्टी और उपज के बारे में जानकारी उपलब्ध करा सकती है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी। इसके अलावा बिज़नेस जगत, स्वास्थ्य क्षेत्र और शिक्षा में AI के अनुप्रयोगों की संख्या भी निरंतर बढ़ रही है।

India AI Impact Summit 2026 जैसे आयोजन में वैश्विक तकनीकी दिग्गज, नीतिनिर्माता और शोधकर्ता शामिल हैं, जो आने वाले दशक में AI के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा आयामों को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत की भूमिका केवल तकनीक का उपभोक्ता बनकर रहना नहीं है, बल्कि यह उसे नए वैश्विक मानकों और नियमों के निर्माण में मुख्य भागीदार के रूप में देखने की इच्छा भी रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत ने शिक्षा, नीतियाँ और निवेश को संतुलित किया, तो यह AI की वैश्विक आर्थिक रेस में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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