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मोहित चौहान, तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा ने राष्ट्रीय जल मिशन और जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर ‘जल वाणी’ अभियान का समर्थन किया

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मोहित चौहान, तापसी पन्नू और अनुभव सिन्हा ने राष्ट्रीय जल मिशन और जल शक्ति
मंत्रालय के साथ मिलकर ‘जल वाणी’ अभियान का समर्थन किया, लोगों से रोज़ पानी बचाने की अपील की

भारत में पानी की कमी, नदियों का प्रदूषण और अनियमित जल आपूर्ति अब कई लोगों के
दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई है। इस समस्या से निपटने के लिए मिर्ची ने राष्ट्रीय जल मिशन और जल शक्ति
मंत्रालय के साथ मिलकर देशव्यापी ‘जल वाणी’ अभियान शुरू किया है। गायक मोहित चौहान, अभिनेत्री तापसी
पन्नू और फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा इस पहल का समर्थन कर रहे हैं और लोगों से पानी बचाने के लिए छोटे-छोटे
कदम उठाने की अपील कर रहे हैं।
‘जल वाणी’ अभियान रोज़मर्रा की परिस्थितियों और जानी-पहचानी आवाज़ों के माध्यम से पानी को लेकर
स्वाभाविक बातचीत शुरू करता है। यह अभियान ‘जल संचय, जन भागीदारी’ की सोच पर आधारित है और इसमें
समुदाय को केंद्र में रखा गया है। संदेश स्पष्ट है कि लंबे समय तक पानी की सुरक्षा के लिए सरकार की नीतियों के
साथ-साथ हर व्यक्ति की भागीदारी भी जरूरी है। अभियान के हर एपिसोड में देशभर के सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त
‘वॉटर वॉरियर्स’ को दिखाया गया है, जिन्होंने पानी बचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए व्यावहारिक कदम
उठाए हैं।
मोहित चौहान ने कहा, “हम अक्सर पानी को तब तक हल्के में लेते हैं, जब तक उसकी कमी महसूस नहीं होती। ‘जल
वाणी’ का हिस्सा बनकर मुझे लोगों को याद दिलाने का मौका मिला कि हर छोटा कदम मायने रखता है, जैसे नल
बंद करना, हर बूंद बचाना या आसपास हो रही बर्बादी पर ध्यान देना। ये छोटे-छोटे कदम मिलकर जिम्मेदारी की
बड़ी सोच बनाते हैं। मुझे उम्मीद है कि मेरी आवाज़ लोगों को सोचने और कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी, क्योंकि
पानी हम सबकी साझा जिम्मेदारी है और अब कार्रवाई का समय है। मुझे खुशी है कि जल शक्ति मंत्रालय और मिर्ची
ने यह पहल की है।”
तापसी पन्नू ने कहा, “पानी बचाना सिर्फ सरकारी नीति का विषय नहीं है, यह हम सभी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है।
आज बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारा वादा है।”
मिर्ची ‘जल वाणी’ से जुड़े वॉटर वॉरियर्स ने भी एकमत होकर कहा, “भारत में पानी की स्थिति वर्षों से हो रहे
अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण और प्राकृतिक सीमाओं की अनदेखी का परिणाम है। यह सिर्फ उपलब्धता का नहीं, बल्कि
जागरूकता और सोच का भी सवाल है। सरकार नीतियाँ बना सकती है, लेकिन संरक्षण तभी सफल होगा, जब
नागरिक पानी को साझा और सीमित संसाधन के रूप में समझेंगे।”
यह अभियान आरजे द्वारा तैयार किए गए डिजिटल कंटेंट के माध्यम से भी चलाया जा रहा है, जिससे यह संदेश
शहरों और युवाओं तक पहुँच सके, जो रोजमर्रा की आदतों को प्रभावित करते हैं। ‘जल वाणी’ के जरिए राष्ट्रीय जल
मिशन और जल शक्ति मंत्रालय उम्मीद करते हैं कि अधिक से अधिक लोग पानी को एक कीमती और साझा संसाधन
के रूप में समझें और उसे बचाने की दिशा में कदम उठाएँ।

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