
देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अब हर जिले में चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर केरोसीन (मिट्टी का तेल) बेचने की अनुमति दे दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी तौर पर लागू की गई है, ताकि आम लोगों को वैकल्पिक ईंधन आसानी से उपलब्ध कराया जा सके और रसोई गैस पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
सरकार के इस फैसले के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा संचालित चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर केरोसीन का भंडारण और बिक्री की अनुमति दी गई है। हर जिले में अधिकतम दो पेट्रोल पंपों को इसके लिए चुना जाएगा और एक पंप पर करीब 5000 लीटर तक केरोसीन रखने की अनुमति होगी। यह कदम खासतौर पर उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है, जहां एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिससे भारत में भी गैस और ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। इसी के चलते सरकार ने केरोसीन को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में फिर से सक्रिय किया है, ताकि घरेलू जरूरतों—जैसे खाना पकाने और रोशनी—को पूरा किया जा सके।
इससे पहले भी सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त केरोसीन आवंटित किया था और अब वितरण को तेज करने के लिए पेट्रोल पंप नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियमों में भी कुछ छूट दी गई है, जिससे केरोसीन की स्टोरेज और सप्लाई में तेजी लाई जा सके। हालांकि, सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल 60 दिनों के लिए लागू रहेगी या अगले आदेश तक जारी रहेगी। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा हालात में राहत देना है, न कि स्थायी रूप से केरोसीन की वापसी करना।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार लगातार यह भी कह रही है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कुल आपूर्ति पर्याप्त है और घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर यह कदम उठाया गया है, ताकि किसी भी संभावित संकट से निपटा जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।
कुल मिलाकर, पेट्रोल पंपों पर केरोसीन बिक्री की अनुमति देना सरकार की एक आपातकालीन रणनीति का हिस्सा है, जो ऊर्जा संकट के बीच आम लोगों को राहत देने और ईंधन आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



