पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमृतसर नॉर्थ विधानसभा सीट से पार्टी के विधायक और पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार, 2 नवंबर को अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेजा। उनका इस्तीफा 1 नवंबर 2026 से प्रभावी करने की बात कही गई है। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने की औपचारिक पुष्टि अलग प्रक्रिया है।
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए अमृतसर के लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जो प्यार और सम्मान दिया है, उसके लिए वह आखिरी सांस तक आभारी रहेंगे। अपने संदेश में उन्होंने दावा किया कि विधायक के तौर पर उन्होंने अपने तय किए गए करीब 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरे किए हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पंजाब में साफ-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देना है।
अपने संदेश में कुंवर विजय प्रताप ने पंजाब की मौजूदा समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य को नशे, जबरन वसूली, गैंगस्टरवाद और भ्रष्टाचार जैसी चुनौतियों से बाहर निकालने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने राजनीति में केवल गलियों और सड़कों के काम या उद्घाटन तक सीमित रहने के बजाय व्यापक विकास पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने अपने अगले कदम को लेकर कहा कि उनका मकसद केवल ‘पंजाब फर्स्ट’ रहेगा।
कुंवर विजय प्रताप ने विधायक के तौर पर अपने कामों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने विधानसभा में अमृतसर के लोगों की समस्याओं को लगातार उठाया। इनमें पानी और सीवरेज की व्यवस्था, सर्किट हाउस, कंपनी बाग, गंदे नाले, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, सरकारी मेडिकल कॉलेज और सरूप रानी कॉलेज जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने बरगाड़ी बेअदबी मामले का भी जिक्र किया और दावा किया कि उन्होंने विधानसभा में स्थानीय इलाकों की समस्याओं को मोहल्लों और गलियों के नाम के साथ उठाया।
कुंवर विजय प्रताप का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब पंजाब में आम आदमी पार्टी के भीतर लगातार राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। इससे एक दिन पहले विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान किया था। इस तरह दो दिनों के भीतर पार्टी के तीन विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आई है। इससे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है।
कुंवर विजय प्रताप और AAP नेतृत्व के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। जून 2025 में पार्टी ने कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई तब हुई थी, जब उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तारी और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद से वह कई मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार की आलोचना करते रहे हैं।
राजनीति में आने से पहले कुंवर विजय प्रताप सिंह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी थे। उन्होंने 2021 में समय से पहले पुलिस सेवा से रिटायरमेंट लिया और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने अमृतसर नॉर्थ सीट से जीत दर्ज की थी। पुलिस अधिकारी रहते हुए वह 2015 के कोटकपूरा और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग मामलों की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) का हिस्सा भी रहे थे।
फिलहाल कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपने भविष्य के राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है। उन्होंने केवल जनता के साथ मिलकर पंजाब के लिए आगे की रणनीति बनाने और साफ-सुथरी राजनीति की दिशा में काम करने की बात कही है। विधानसभा अध्यक्ष उनके इस्तीफे पर क्या फैसला लेते हैं और आने वाले दिनों में AAP छोड़ने वाले नेताओं की संख्या बढ़ती है या नहीं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।



