
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया, जिसने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में मरने वालों की संख्या 579 तक पहुंच गई है, जबकि 1,924 लोग अब भी लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 7 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और आसपास के इलाकों में पड़ा है। बाढ़ के तेज बहाव ने सड़कें, पुल, इमारतें और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बिजली और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भी मुश्किल हो रही है। रेड क्रॉस के शुरुआती आकलन के अनुसार करीब 90,000 लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
सबसे बड़ी चिंता अब भी लापता लोगों को लेकर है। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। इनमें भारत के पर्यटक, तीर्थयात्री और नेपाल में काम करने वाले भारतीय नागरिक शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 320 भारतीयों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें मानसरोवर यात्रा पर गए लोग और त्रिशूली हाइड्रोपावर परियोजना में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं। नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार हेलीकॉप्टरों तथा जमीनी टीमों के जरिए लोगों को निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
इस बीच बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेपाल और चीन की सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झीलों को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर इन झीलों में जमा पानी अचानक बाहर निकलता है तो निचले इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। शुक्रवार को एक झील से पानी बहने की सूचना के बाद नेपाल में कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा और लोगों को सुरक्षित तथा ऊंचे स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई।
चीन की ओर से भी राहत और बचाव अभियान जारी है। चीनी बचाव दल शुक्रवार को तबाह हो चुके Gyirong बॉर्डर क्रॉसिंग क्षेत्र तक पहुंचा, जहां सड़कें और रास्ते पूरी तरह बह चुके थे। बचावकर्मियों ने वहां पहुंचने के लिए पहाड़ों, जंगलों और खतरनाक रास्तों को पार किया। मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें बड़े पैमाने पर तबाही दिखाई दी।
भारत भी नेपाल की मदद के लिए लगातार राहत सामग्री भेज रहा है। भारतीय अधिकारियों ने नेपाल में फंसे नागरिकों को निकालने और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए नेपाल तथा चीन के साथ समन्वय बढ़ाया है। भारत की ओर से राहत सामग्री और Bailey Bridge बनाने के लिए जरूरी सामान भी भेजा गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस आपदा की शुरुआत ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर के ढहने से हुई, जिसके बाद पानी और मलबे का विशाल प्रवाह पहाड़ी नदी तंत्र में उतर गया। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे को देखते हुए ऐसी घटनाओं को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों को आशंका है कि दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के बाद मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या में और बदलाव हो सकता है।



