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पाकिस्तान में ‘फ्यूल बम’ फूटा

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मध्य पूर्व में जारी युद्ध और वैश्विक तेल संकट का सबसे बड़ा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आ रहा है। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद पेट्रोल 458 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। यह वृद्धि इतनी तेज है कि आम जनता के लिए ईंधन भरवाना भी मुश्किल होता जा रहा है और महंगाई ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं।

सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गई हैं। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण यह बढ़ोतरी “मजबूरी” बन गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, डीजल की कीमत में करीब 55% और पेट्रोल में 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले कुछ दशकों में सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है। खास बात यह है कि यह एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी वृद्धि है, जिससे आम लोगों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई है।

इस कीमत वृद्धि का सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न वर्ग पर पड़ रहा है। पाकिस्तान जैसे देश में जहां पहले से ही महंगाई और आर्थिक संकट गहरा है, वहां ईंधन की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा के सामानों की लागत भी तेजी से बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों से लेकर किराए तक हर चीज महंगी हो सकती है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही आयात पर निर्भर है, खासकर तेल के मामले में। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों से होकर आता है। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर पाकिस्तान की ऊर्जा लागत पर पड़ता है।

हालांकि सरकार ने कुछ राहत उपायों की घोषणा की है, जैसे छोटे किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए सीमित सब्सिडी, लेकिन वित्तीय संकट के चलते व्यापक राहत देना संभव नहीं बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि संसाधनों की कमी और युद्ध की अनिश्चितता के कारण बड़े स्तर पर सब्सिडी जारी रखना मुश्किल है।

इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान में सामाजिक और आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है। जगह-जगह लोगों के विरोध और नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं, क्योंकि ईंधन की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की रिकॉर्ड कीमतें सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़े वैश्विक संकट का संकेत हैं। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है और इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

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