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‘रिजीम चेंज’ बयान पर BJP-कांग्रेस में टकराव

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देश में ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनावी सुधार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध की आड़ में सरकार बदलने के लिए अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का मकसद चुनाव के जरिए सरकार बदलना है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

लखनऊ में 16 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई केवल चुनाव सुधार, SIR या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश के युवाओं को अराजक राजनीति में शामिल कर रहा है और बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम से प्रेरित होकर सत्ता परिवर्तन की बात कर रहा है। राजनाथ सिंह ने विपक्ष के इस रुख को लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरा बताया। ये आरोप भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं; विपक्ष ने इनकी व्याख्या से असहमति जताई है।

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने भी वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के बयान को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। पात्रा के मुताबिक, प्रशांत भूषण ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह लड़ाई ‘रिजीम चेंज’ के लिए है, जिससे विपक्ष की मंशा स्पष्ट होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव के जरिए सत्ता हासिल करने के बजाय सरकार को हटाने की कोशिश कर रहा है। पात्रा ने कहा कि भारत के संविधान में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है और राजनीतिक दलों को उसी प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए।

विवाद की शुरुआत 15 अक्टूबर को दिल्ली में हुई एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी है। इसमें प्रशांत भूषण, CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा सहित कई लोग शामिल हुए थे। प्रशांत भूषण ने कहा था कि अगर सरकार का रवैया जारी रहता है तो सरकार बदलनी होगी और उन्होंने ‘रिजीम चेंज’ की बात स्वीकार की थी। उनके बयान को भाजपा नेताओं ने सरकार के खिलाफ अराजकता फैलाने की मंशा के रूप में पेश किया।

नेहा बोरा के बांग्लादेश से जुड़े बयान ने भी विवाद को और बढ़ाया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बांग्लादेश के एक छात्र संगठन को संदेश देते हुए कहा था कि वहां के युवाओं के आंदोलन ने उन्हें रास्ता दिखाया है। उन्होंने धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख करते हुए भारत में छात्रों की सरकार विरोधी गतिविधियों से इसकी तुलना की थी। भाजपा नेताओं ने इन टिप्पणियों को बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश से जोड़ा, जबकि बयान के संदर्भ और उसके राजनीतिक अर्थ को लेकर मतभेद सामने आए हैं।

राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष खुले तौर पर चुनाव के जरिए मौजूदा सरकार को हराने और सत्ता बदलने की बात कर रहा है, इसलिए ‘रिजीम चेंज’ शब्द को लेकर इतना विवाद क्यों किया जा रहा है। खेड़ा ने 1977 के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का उद्देश्य चुनाव जीतकर सरकार बदलना ही होता है। उन्होंने राजनाथ सिंह की टिप्पणी पर तंज कसते हुए भाजपा पर लोकतांत्रिक विरोध को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस बहस में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मौजूदा संघर्ष संविधान में विश्वास रखने वालों और अराजकतावादियों के बीच है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के प्रदर्शनों को कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़कर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध, सरकार की आलोचना और चुनाव के जरिए सत्ता बदलने की मांग लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली में CJP के प्रदर्शन और SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। भाजपा ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयानों को विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध और चुनावी बदलाव की मांग बता रही है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और इस बहस का केंद्र यह सवाल है कि सत्ता परिवर्तन की मांग को राजनीतिक विरोध के रूप में कैसे समझा जाए तथा विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून का पालन कैसे सुनिश्चित हो।

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