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CEC ज्ञानेश कुमार विवाद पर रामदास अठावले का बयान

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि उनसे जुड़ी उठ रही मांगों और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद के मामले की सरकार जांच करेगी। उन्होंने चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक विवाद नहीं होना चाहिए। अठावले का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

अठावले ने कहा कि चुनाव आयोग का काम स्वतंत्र रूप से होना चाहिए और उसका किसी राजनीतिक दल से सीधा संबंध नहीं होना चाहिए। ज्ञानेश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को देखेगी। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से पहले कहा गया है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आंतरिक आपत्तियों को आयोग के अंतिम निर्णयों के समान नहीं माना जाना चाहिए।

SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी अठावले ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने और गलत दस्तावेजों के आधार पर दर्ज नामों की जांच के लिए SIR की प्रक्रिया जरूरी है। वहीं, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से मतदाता अधिकारों और नाम हटाए जाने से जुड़े सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं। इन दावों और आपत्तियों पर चुनाव आयोग तथा राजनीतिक दलों के बीच सार्वजनिक बहस जारी है।

इसी दौरान अठावले ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने पार्टी के नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत के युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं और उन्हें इस तरह के नाम से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। इससे पहले अठावले ने डिपके को अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में शामिल होने का न्योता भी दिया था।

अठावले के इस पुराने प्रस्ताव पर डिपके ने सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सवाल किया था कि कुछ समय पहले उन्हें देशविरोधी कहने वाले अब पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव क्यों दे रहे हैं। इस बयान के बाद दोनों के बीच राजनीतिक और सार्वजनिक बयानबाजी चर्चा में रही थी।

CJP की ओर से हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई है। पार्टी ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप पार्टी के दावे हैं और इनके संबंध में अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के बयान सामने आए हैं।

ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की खबरें भी सामने आई हैं। वहीं आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में इस पूरे मामले में एक तरफ राजनीतिक दलों की मांगें और आरोप हैं, जबकि दूसरी तरफ संवैधानिक संस्था की ओर से निर्णय प्रक्रिया को लेकर अलग रुख सामने आया है।

फिलहाल अठावले के बयान के बाद ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। इस मामले में सरकार की ओर से किसी जांच की विस्तृत प्रक्रिया या उसके निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार की ओर से जांच किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

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