
सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन एनएचपीसी (NHPC) तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। भूस्खलन और संदिग्ध मीथेन गैस विस्फोट के बाद सुरंग का एक हिस्सा मलबे से भर गया, जिससे कई मजदूर भीतर फंस गए। हादसे के बाद से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पुलिस, फायर सर्विस और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सुरंग के भीतर फंसे अन्य मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राहत अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर फैली मीथेन गैस, ऑक्सीजन की कमी, बेहद कम दृश्यता और संकरा रास्ता है। जहरीली गैस के कारण बचावकर्मियों को विशेष ऑक्सीजन उपकरण और सुरक्षा किट पहनकर सीमित समय के लिए ही सुरंग के अंदर भेजा जा रहा है। कई बार गैस की अधिक मात्रा के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना भी पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत चट्टानों से निकली गैस के कारण विस्फोट हुआ, जिसके बाद भूस्खलन ने सुरंग के प्रवेश मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।
राहत कार्य को तेज करने के लिए विभिन्न राज्यों से विशेषज्ञ टीमें और गैस सुरक्षा उपकरण मंगाए गए हैं। पश्चिम बंगाल से विशेष तकनीकी दल को घटनास्थल पर भेजा गया है, जबकि अतिरिक्त एनडीआरएफ टीमें भी अभियान में शामिल की गई हैं। बचावकर्मी सुरंग के उस हिस्से तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। भारी मलबा हटाने के लिए आधुनिक मशीनों और विशेष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन लगातार जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के कारण अभियान बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से ठीक पहले सुरंग के भीतर तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। इसके तुरंत बाद धुआं और धूल का गुबार फैल गया और सुरंग का एक हिस्सा धंस गया। कुछ मजदूर समय रहते बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई अन्य अंदर ही फंस गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि प्राकृतिक गैस के अचानक रिसाव और उसके बाद हुए विस्फोट ने हादसे को और गंभीर बना दिया। हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सिक्किम सरकार और एनएचपीसी के वरिष्ठ अधिकारी लगातार घटनास्थल की निगरानी कर रहे हैं। राज्य प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। साथ ही हादसे के कारणों की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता अभी सभी फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित पहुंचना और राहत अभियान को सफल बनाना है। इसके बाद निर्माण कार्य में अपनाए गए सुरक्षा मानकों और संभावित लापरवाही की भी विस्तार से जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण परियोजनाओं के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती हैं। चट्टानों की अस्थिरता, प्राकृतिक गैस का रिसाव और लगातार भूस्खलन का खतरा ऐसे कार्यों को और जटिल बना देता है। इसलिए इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली, गैस डिटेक्शन उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित किया है।
फिलहाल पूरे देश की निगाहें इस राहत अभियान पर टिकी हुई हैं। बचाव दल लगातार विषम परिस्थितियों के बावजूद सुरंग के भीतर फंसे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि विशेष उपकरणों और विशेषज्ञ टीमों की मदद से अभियान में तेजी आएगी और जल्द से जल्द सभी प्रभावित लोगों तक पहुंचने में सफलता मिलेगी। साथ ही इस घटना से जुड़े सभी तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।



