
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के लिए रखीं 3 शर्तें
राजधानी दिल्ली में चल रहे CJP आंदोलन और ‘संसद चलो’ अभियान के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं। खास बात यह रही कि इन शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सीधा उल्लेख नहीं किया गया, जबकि CJP पिछले कई सप्ताह से परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करता रहा है। इस बदलाव के बाद आंदोलन की रणनीति को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, या फिर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद संसद के भीतर इन मुद्दों को गंभीरता से उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने पर विचार करेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता उनसे मिलकर इन मुद्दों पर ठोस आश्वासन दें। इन शर्तों से यह संकेत मिला है कि आंदोलन केवल किसी एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित न रहकर व्यापक शिक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि CJP की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि संगठन की मूल मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। संगठन अब भी परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों की जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहा है। साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी संगठन के एजेंडे का हिस्सा बनी हुई है। CJP नेताओं का कहना है कि सोनम वांगचुक की व्यक्तिगत शर्तें और संगठन की राजनीतिक मांगें अलग-अलग संदर्भों में देखी जानी चाहिए।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे और इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार सुनिश्चित कराना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उनकी आवाजाही, संवाद और संचार पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर भी बहस तेज हो गई।
इधर CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली की सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा अनियमितताओं, युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। बाद में सरकार की ओर से संवाद की पहल के संकेत मिले और आंदोलन के प्रतिनिधियों तथा केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के बीच बातचीत भी हुई। इसके बाद आंदोलन के अगले चरण और संभावित समाधान को लेकर उम्मीदें भी जताई जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोनम वांगचुक की नई शर्तें आंदोलन को अधिक व्यापक स्वरूप देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच सार्थक बातचीत आगे बढ़ती है तो शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल की संभावना बन सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन का अगला चरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।



