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तीन साल तक कोमा में जिंदगी से लड़ती रहीं थाईलैंड की राजकुमारी बज्रकितियाभा

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थाईलैंड के शाही परिवार से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी बेटी और देश की प्रमुख शाही हस्तियों में शामिल राजकुमारी बज्रकितियाभा नरेंद्रदेब्यावती का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह दिसंबर 2022 से कोमा में थीं और पिछले लगभग तीन वर्षों से बैंकॉक के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की आधिकारिक घोषणा थाई शाही महल की ओर से की गई, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। भारत सरकार ने भी राजकुमारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए थाईलैंड की सरकार, शाही परिवार और वहां की जनता के प्रति संवेदना प्रकट की।

राजकुमारी बज्रकितियाभा को थाईलैंड में केवल शाही परिवार की सदस्य के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सफल वकील, राजनयिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाना जाता था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया में थाईलैंड की राजदूत भी रह चुकी थीं। इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर महिला कैदियों के अधिकारों और न्याय व्यवस्था में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उनकी छवि एक आधुनिक, शिक्षित और जनसेवा के लिए समर्पित राजकुमारी की थी।

राजकुमारी की तबीयत पहली बार दिसंबर 2022 में अचानक बिगड़ी थी। वह उस समय अपने पालतू कुत्तों को एक प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षित कर रही थीं, तभी उन्हें गंभीर हृदय संबंधी समस्या हुई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। हालांकि बाद में उनकी हालत और गंभीर होती चली गई। लंबे समय तक कोमा में रहने के दौरान उन्हें कई जटिल संक्रमणों, हृदय की अनियमित धड़कन, रक्त के थक्के बनने की समस्या और अन्य अंगों से जुड़ी चिकित्सीय परेशानियों का सामना करना पड़ा। आखिरकार तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

राजकुमारी बज्रकितियाभा थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोर्न की सबसे बड़ी संतान थीं और उन्हें शाही परिवार की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में गिना जाता था। राजनीतिक और संवैधानिक मामलों की उनकी समझ के कारण उन्हें भविष्य में राजशाही की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाली प्रमुख हस्तियों में भी देखा जाता था। यही वजह है कि उनके निधन को केवल शाही परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि थाईलैंड की राजशाही के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके निधन के बाद देश में उत्तराधिकार (Succession) को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो सकती हैं।

भारत ने इस दुखद अवसर पर थाईलैंड के साथ अपनी संवेदनाएं साझा की हैं। विदेश मंत्रालय ने शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में थाईलैंड की सरकार, शाही परिवार और वहां की जनता के साथ खड़ा है। भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से मजबूत सांस्कृतिक, धार्मिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में राजकुमारी के निधन पर भारत की ओर से व्यक्त संवेदना दोनों देशों के घनिष्ठ रिश्तों को भी दर्शाती है।

राजकुमारी बज्रकितियाभा ने अपने सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के अधिकार, न्यायिक सुधार और सामाजिक कल्याण जैसे विषयों पर विशेष रूप से काम किया। उन्होंने जेल सुधार कार्यक्रमों और महिला कैदियों के पुनर्वास के लिए कई परियोजनाओं का नेतृत्व किया। संयुक्त राष्ट्र के साथ उनके सहयोग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सराहा गया था। इसके अलावा उन्होंने थाई सेना और सरकारी संस्थानों में भी कई जिम्मेदार पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं। उनकी बहुआयामी भूमिका ने उन्हें देश की सबसे सम्मानित सार्वजनिक हस्तियों में शामिल कर दिया था।

राजमहल की घोषणा के बाद पूरे थाईलैंड में शोक का माहौल है। सरकारी भवनों पर झंडे झुका दिए गए हैं और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बड़ी संख्या में लोग राजकुमारी को श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के नेताओं, राजनयिकों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है और उनके सामाजिक कार्यों को याद किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजकुमारी बज्रकितियाभा का निधन थाईलैंड के शाही इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त होने जैसा है। उन्होंने अपने जीवन में कानून, कूटनीति, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। तीन वर्षों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उनका इस दुनिया से जाना न केवल थाईलैंड बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निधन ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सार्वजनिक जीवन में सेवा और समर्पण ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान बनते हैं।

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