
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग के बाद फिल्म इंडस्ट्री और अंडरवर्ल्ड के बीच पुराने संबंधों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। 18 अक्टूबर 2026 को हुई इस घटना में टाइगर श्रॉफ को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर सामने आई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित पोस्ट और ऑडियो संदेश सामने आए, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। हालांकि, इस दावे और हमले के पीछे की पूरी साजिश की जांच जारी है।
मुंबई में फिल्मी हस्तियों को निशाना बनाने की घटनाओं का इतिहास काफी पुराना है। 1980 और 1990 के दशक में अंडरवर्ल्ड के कुछ गिरोहों ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों पर दबाव बनाने, धमकी देने और कथित तौर पर वसूली करने की कोशिशें की थीं। उस दौर में फिल्मों के वित्तपोषण, वितरण और कारोबार से जुड़े लोगों को भी धमकियों का सामना करना पड़ा। गुलशन कुमार की हत्या और कुछ फिल्म निर्माताओं पर हुए हमलों ने फिल्म इंडस्ट्री में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की थी।
आज के दौर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम कई चर्चित आपराधिक मामलों और फिल्मी हस्तियों को मिली धमकियों के संदर्भ में सामने आया है। अभिनेता सलमान खान के साथ इस गैंग की दुश्मनी की चर्चा 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी बताई जाती है। बिश्नोई समुदाय काले हिरण को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है। इसी पृष्ठभूमि में सलमान खान को कई बार धमकियां मिलने और अप्रैल 2024 में उनके मुंबई स्थित आवास के बाहर गोलीबारी की घटना के बाद उनकी सुरक्षा का मुद्दा सुर्खियों में रहा।
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद सामने आए कथित संदेशों में सलमान खान के साथ काम करने वाले लोगों को भी निशाना बनाने की धमकी दिए जाने की बात कही गई। इस वजह से घटना को केवल एक अभिनेता पर हमले तक सीमित न मानकर फिल्म इंडस्ट्री में दहशत फैलाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, किसी सोशल मीडिया पोस्ट में जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हमला वास्तव में उसी गिरोह ने कराया था। जांच एजेंसियां कथित संदेशों, हमलावरों और उनके संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।
बिश्नोई गैंग से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया और विदेश में मौजूद कथित सहयोगियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा रही है। जांच से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, गिरोह के सदस्य कथित तौर पर अलग-अलग शहरों में स्थानीय लोगों के जरिए हमले कराने और डिजिटल माध्यमों से संपर्क बनाए रखने का प्रयास करते हैं। एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेशों की मदद से कथित धमकियों को सार्वजनिक करने का तरीका भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रहा है। हालांकि, हर मामले में इन संपर्कों और दावों की अलग-अलग जांच आवश्यक है।
इस मामले में पुलिस ने संदिग्धों की तलाश और जांच तेज की। खबरों के मुताबिक, फायरिंग में शामिल होने के संदेह में तीन लोगों को राजस्थान के कोटा में हिरासत में लिया गया। पुलिस की जांच में हमले की योजना, कथित गैंग कनेक्शन और आरोपियों के संभावित संपर्कों का पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है। जांच पूरी होने और अदालत में सबूत सामने आने से पहले किसी व्यक्ति या गिरोह की भूमिका को अंतिम रूप से स्थापित मानना उचित नहीं होगा।
दाऊद इब्राहिम के दौर से लेकर मौजूदा समय तक बॉलीवुड और संगठित अपराध के संबंधों में काफी बदलाव आया है। पहले जहां धमकियों और वसूली के जरिए फिल्म कारोबार को प्रभावित करने की कोशिशें चर्चा में रहती थीं, वहीं अब कथित गैंग नेटवर्क सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर अपनी मौजूदगी दिखाने और डर पैदा करने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि बड़े शहरों में चर्चित हस्तियों की सुरक्षा और संगठित अपराध के नेटवर्क पर नियंत्रण के लिए एजेंसियों को किस तरह की रणनीति अपनानी चाहिए।



